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कुछ नहीं, लगाओ ना, घुसेड़ो ना लंड अन्दर तक, प्लीज

कुछ नहीं, लगाओ ना, घुसेड़ो ना लंड अन्दर तक, प्लीज

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रितू ने दिल्ली से मुझे अपनी पहली चुदाई की वास्तविक कहानी भेजी रही हु। मेरे बदन का फिगर 32,36,32 है उसे मै अपने शब्दो में ढाल कर आपको पेश कर रही हूँ। मैने सीनियर सेकन्डरी परीक्षा 70 प्रतिशत अंकों से पास कर ली थी, अब कॉलेज में फ़र्स्ट ईयर साईन्स में प्रवेश ले लिया था। मेरा एडमिशन घर से बाहर जहां मै चाहती थी,

पन्जिम, गोआ में मिला था। मैने वहां एक किराये का कमरा ले लिया। पापा ने एक काम वाली लगा दी और वापस भटिंडा चले गये। मेरे मकान मालिक का लड़का माइकल था जो मुझ पर शुरु से ही लाईन मारता था। मुझे भी वो अच्छा लगता था, पर वो अधिकतर अपने धन्धे ही लगा रहता था। कभी कभी लाईन मारने के इरादे से वो दुकान पर जाने के पहले मुझे मिलने आता था। पर मेरा मन उससे बहुत जल्दी उचट गया था, क्योंकि वह ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं था, बारहवीं के बाद वो अपने घरेलू बिजनेस में लग गया था। मै यहाँ बहुत ही खुश थी, बचपन से मैने गोआ की सुन्दरता का नाम सुना था और अब मै अपने मनपसन्द की जगह पर आ चुकी थी। अब तक तो मै गर्ल्स स्कूल में थी, पर यहाँ को-एजुकेशन है। कक्षा में हम 8 लड़कियाँ थी। पंजाबी होने से उनमें सबसे सुन्दर, लम्बी हूँ और अच्छा फ़िगर मेरा ही है। कुछ ही दिनों में लड़के मुझ पर लाईन मारने लगे थे। मेरे सुन्दर होने से ये मेरी इच्छा थी कि मै सबसे अच्छा ही चुनूं। एक लड़का जिसका नाम मैने बदल कर सन्दीप रखा है, मुझे बहुत प्यारा लगता था। वो मेरे अनुसार ही लम्बा था, हंसमुख था, जिस्म से बलशाली लगता था, मै उसे रितिक रोशन कहती थी। मेरे बोबे छोटे थे, पर ब्रा पहनने पर गोल गोल और भले लगते थे। मेरा दुबला पतला और लम्बा बदन, बूरड़ों के उभार, उनकी गोलाइयाँ सामान्य थी। जब कभी सन्दीप मुझसे बात करता था तो मै उसे बातों में उलझा लेती थी और देर तक बातें करती थी। सन्दीप अन्दर ही अन्दर दिल में मुझे चाहता था। फ़्री पीरियड में हम दोनों अक्सर केन्टीन में आ जाते थे। संदीप भी मेरी ही तरह 19 वर्ष का था। एक बार… “स्वीटी, तुम्हारा कोई दोस्त है लड़कों में?” सन्दीप ने पूछा। “नहीं अब तक तो नहीं, मै तो गर्ल्स स्कूल में थी, बस लड़कियाँ ही मेरी दोस्त रही हैं !” “मुझसे दोस्ती करोगी?” “तुम्हारी तो कई लड़कियाँ दोस्त हैं, कितनी से तो तुम बातें करते हो !” “नहीं मुझे तो बस तुम अच्छी लगती हो।” कहते ही वो झेंप गया,”सॉरी स्वीटी… मेरा मतलब था कि…” मेरी आंखें झुक गई। मै शरमा गई, सन्दीप ने यह क्या कह दिया। दिल धड़क उठा। “स्वीटी, मेरा मतलब यह नहीं था… मै तो दोस्ती की बात कर रहा था !” सन्दीप हड़बड़ा गया। मैने अपना चेहरा दोनो हाथों से छिपा लिया। मेरा चेहरा लाल हो उठा। किसी के दिल की बात सामने आ रही थी। मैने साहस जुटाया और मन की बात कह डाली। “सन्दीप, मै तो तुम्हारी ही दोस्त हूँ, मुझे तुम भी बहुत अच्छे लगते हो !” लड़खड़ाती जुबान से मैने कह ही डाला। मैने चेहरे से हाथ हटाते हुए कहा, मेरी आंखें शर्म से लाल हो गई थी। उसे मैने एकटक निहारते हुए कहा,”सच कहूँ सन्दीप, क्लास में तुम जैसा कोई नहीं !” “नहीं स्वीटी, तुम सा कोई नहीं है, तुम मुझे परी जैसी सुन्दर लगती हो !” “तुम मुझे, जानते हो, रितिक रोशन फ़िल्म स्टार जैसे लगते हो !” जाने समय कैसे निकल गया। अगला पीरियड आ गया, हम दोनों उठे और क्लास की ओर जाने लगे,”सुनो स्वीटी, आज क्लास छोड़ो, चलो कहीं चलते हैं !” मैने उसकी ओर देखा, पर वहाँ सिर्फ़ प्यार था, मै मना नहीं कर सकी, मै उसका साथ अधिक से अधिक देर तक चाहती थी। उसने अपनी मोटर साईकल उठाई और मीरा-मार बीच की तरफ़ चल दिये। दिन का समय था, बीच खाली था, इक्के दुक्के लोग यहाँ वहाँ दिखाई दे रहे थे। पेड़ों की छांव में पार्क के पास कई जोड़े वहाँ पहले से ही जमे थे। यह यहाँ का आम दृश्य था। हमने भी एक कोना पकड़ लिया और सीमेंट की बेंच पर बैठ गये। हमारे पास वाला जोड़ा चुम्बन में मग्न था, शायद वो लड़की के स्तनों से भी खेल रहा था। सन्दीप ने मुझे इशारे से बताया,”वो देखो, कितना प्यार करते हैं एक दूसरे को !” मैने भी उसे प्यासी नजरो से देखा। सन्दीप समझ चुका था, प्यार की कोई भाषा नहीं होती। हमारे चेहरे नजदीक आने लगे, आंखें स्वत: ही एक दूसरे में खो गई। दोनों की आंखों में भरपूर प्यार था। मेरी आंखें बंद होने लगी। सन्दीप के होंठ मेरे गालों को चूमने लगे। मेरा जिस्म कंपकपाने लगा। होंठ कांपने लगे। मै एक असहाय सी लता की तरह उसकी बाहों में झूल गई। मेरे कांपते होंठों को उसके होंठों ने दबा लिया। दिल धड़क उठा, उसकी जीभ मेरे मुख में प्रवेश कर गई। मेरे वक्षस्थल पर उसके हाथों का दबाव आ गया। मै अपना होश खो बैठी। मेरे होंठ ने भी अब उसकी जीभ को दबा लिया। अचानक हमारी तन्द्रा भन्ग हुई। हमारे सामने दो अंग्रेज महिलायें खड़ी थी,”एक्स्क्यूज मी, में आइ हेव योअर स्नेप्स?” “वाई नोट, थेन्क्स” मैने उन्हें लिपटे हुए ही कहा। “नाउ प्लीज, किस अगेन !” उन्होंने वही सेक्सी पोज बनाने को कहा। हम दोनों फिर से उसी तरह से लिपट पड़े और चूमने लगे और सन्दीप मेरे स्तन दबाने लगा। मै फिर से खोने लगी। “ओके प्लीज, बी नोर्मल नाउ…जस्ट सी इट” वो मेरे पास बैठ गई, और वीडियो चला कर दिखाया। “हाय राम, अपन ऐसे कर रहे थे क्या, और तुम इतने बेशर्म हो, देखो ये क्या कर रहे हो…प्लीज मेम, ट्रान्स्फ़र इट टू माय मोबाईल ऑलसो !” “ओके, नो प्रोबलम” उन्होने मेरे मोबाईल में उसे कॉपी करके डाल दिया। “ओके, प्लीज कन्टीन्यू… सॉरी फ़ोर डिस्टरबेन्स, एन्जोय लव !” कह कर वो दोनों आगे चली गई। अब मुझे शरम आने लगी थी कि मैने ये क्या कर दिया। सन्दीप ने एक बार फिर से मुझे पास में खींच लिया। सामने वाला जोड़ा पर सेक्स एन्जोय कर रहा था। लड़की पैन्ट के ऊपर से ही लड़के का लंड दबा रही थी, और लड़का उसकी शर्ट में हाथ डाल कर चूचियाँ मसल रहा था। सन्दीप ने भी लिपटाये हुए मेरी बूर दबा दी। मै उछल पड़ी। “सन्दीप, ये नहीं करो, मुझे अच्छा नहीं लगता है !” “सॉरी, स्वीटी, मुझसे रहा नहीं गया था, ये देखो तो, इसका क्या हाल है !” उसने अपने लंड की तरफ़ इशारा किया। मैने मौका पा कर तुरन्त ही उसका लंड पकड़ लिया और मसलते हुए अन्दर दबा दिया। “इसे कन्ट्रोल में रखो, समझे !” पर उसके लंड का साईज़ और मोटापन का स्पर्श पा कर मेरा जिस्म कांप गया। सन्दीप के मुख से आह निकल गई। मै खड़ी हो गई। सामने वाले जोड़े की नजर जैसे हम पर पड़ी वो अलग हो गये। मै मुस्करा उठी और उनके पास आ गई। “हाय, मजा आ रहा है ना?” लड़की शरमा गई, मुझे भी बहुत मजा आया, कल भी आप आयेंगे ना…हम भी आयेंगे” लड़का और लड़की दोनों मुस्करा उठे। “आपने तो खूब मजे किये ना, हमने सब देखा, आप का जोड़ा मस्त है, थक्स फ़्रेन्ड्स” रात को कमरे में अकेले लेटे लेटे मुझे बार बार सन्दीप का चुम्बन, वक्ष मर्दन और बूर को दबाना याद आने लगा था। उसके लंड का स्पर्श मेरी जान ले रहा था। मैने मोबाइल पर वीडियो निकाल कर देखा। मेरी बूर में पानी उतर आया। मुझसे रहा नहीं गया तो मैने मोबाईल पर उसे कॉल किया। “सन्दीप, क्या कर रहे हो ?” “पढ़ रहा हूँ और क्या?” “मेरे पास आ जाओ, तुम्हारी बहुत याद आ रही है!” “अभी आऊँ क्या, कोई क्या कहेगा कि रात को आठ बजे तुम्हारे पास लड़के आते हैं !” “आ जाओ ना, अभी यहाँ कोई नहीं है, पास के घर में अंधेरा है।” “अच्छा अभी आता हूँ” उसने फोन रख दिया। मै उसका बेसब्री से इन्तज़ार करने लगी। कुछ ही देर में सन्दीप आ पहुंचा। मै उसका दरवाजे पर ही इन्तज़ार कर रही थी। आते ही उसने पूछा,”क्या हुआ, सब ठीक तो है न?” “नहीं कुछ भी ठीक नहीं है।” “क्या हो गया, ऐसे क्यो बोल रही हो ?” “अन्दर तो आ जाओ पहले, फिर बताती हूँ।” अन्दर आते ही मैने दरवाजा अन्दर से बन्द कर दिया और चैन की सांस ली। उसके आते ही मेरी बैचेनी दूर हो गई और मै जो कहने वाली थी, सब भूल गई। “कुछ तो कहो अब…” “बस तुम आ गये, मै सब भूल गई।” मैने शरमा कर अपनी बात कबूल कर ली। ” स्वीटी तुम भी ना, बस” कह कर वो बिस्तर पर बैठ गया। “अच्छा अब मेरे पास तो आ जाओ ना” “बोलो अब, लो आ गई।” मुझे पता था वो मुझे चूमेगा, छूएगा और मस्ती करेगा। “तुमने मुझे यहाँ बुलाया, और अब चुप हो, कही तुम्हारा मन डोल तो नहीं रहा है ना?” सन्दीप ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी तरफ़ खींच लिया। मै फ़िर शरमा गई। उसने मुझे अपनी गोदी में बैठा लिया और धीरे से कमर में हाथ डाल दिया। मेरा चेहरा उसके चेहरे के बिलकुल पास आ गया। मेरे होंठ कांप उठे। मेरे होंठ खुल गये और नीचे का लब उसके दोनो होंठ के बीच में दब गया। मेर निचला होंठ वो चूसने लगा। उसका एक हाथ मेरे वक्षस्थल पर आ गया। मेरे छोटे छोटे उरोज उसके हाथों में दब गये। मेरे मुख से सिसकारी निकल पड़ी। “स्वीटी, तुमने ब्रा नहीं पहनी” सन्दीप का हाथ मेरे नंगे उरोज पर फ़िसल रहा था। मैने उसके लबों को दबा कर चुप कर दिया। उसके लंड में उफ़ान आ रहा था। मेरा हाथ धीरे से उस पर आ गया और उसके लंड के साइज़ का नाप तौल करने लगा। “सॉरी, स्वीटी, तुम्हारा रूप मुझसे सहा नहीं जा रहा है, ये गरम हो गया है।” मैने फिर से उसके होंठ पर अंगुली रख दी। “सन्दीप, तुम बहुत बोलते हो, चुप रहो, जो होना है वो तो होगा ही।” मेर बदन अब वासना से भर चुका था। कुंवारी कली खिलने को बेताब थी। भंवरा भी डंक मारने को बेताब था। उसने अब धीरे से मेरी बूर की तरफ़ हाथ बढ़ाया तो मैने अपनी टांगें चौड़ी कर ली। उसका हाथ अब मेरी बूर पर था। “तुमने पेन्टी भी नहीं पहनी है।” “अंह्ह्ह, सन्दीप, मत बोलो ना, समझते हो तो कहते क्यो हो ?” मैने उसे नाराजगी जताई। मै अब सन्दीप के हाथों में खिलोने कि तरह खेल रही थी। मेरे अंग अंग को वो फ़्री स्टाईल से दबा रहा था। मुझे बहुत मजा आ रहा था। “सन्दीप, अपनी जीन्स तो ढीली करो ना, इसको कब तक छुपाओगे” “चल हट, ये बिगड़ गया तो फिर तुम नाराज नहीं होना।” सन्दीप ने शरारत से कहा। अपनी जीन्स उसने जल्दी से उतार दी। “और ये अंडरवियर भी उतार दूँ क्या ?” उसने मेरे जवाब का इन्तज़ार नहीं किया औए पूरा नंगा हो गया। मै उसका जिस्म देखती रह गई। चिकना, सुन्दर, तराशा हुआ, गोरा, कोई बाल नहीं… हाय मेरे तो पसीना छूटने लगा। उसे देख कर मेरे बदन में वासना की आग भड़क उठी। मैने भी अपने रहे सहे कपड़े उतार फ़ेंके और नंगी हो गई। मै उससे जा कर लिपट गई, दोनों जिस्म आपस में रगड़ उठे। नंगे जिस्म आपस में चिपक गये, नंगेपन का अह्सास होने लगा। मैने सन्दीप का लंड हाथ में पकड़ लिया… “हाय रे सन्दीप, इतना मोटा लंड, इतना बडा लंड, इसे मेरे जिस्म में समा दो अब।” मै नशे में बहक उठी। उसके हाथ मेरी बूरड़ो की गोलाईयां मसल रहे थे। मै उसके लंड को अपनी बूर से रगड़रही थी। उसका सुपाड़ा अब भी चमड़ी से ढका था। मेरे बूर का रस उसके लंड को गीला कर के तर कर रहा था। सन्दीप मुझे दबा कर बिस्तर पर लेट गया और मेर ऊपर चढ़ गया। मेरे शरीर में मीठी मीठी वासनायुक्त जलन भरने लगी थी। बूर फ़ड़फ़ड़ा उठी थी। उसने अपने लंड का पूरा जोर मेरी बूर पर लगा दिया। पर वो इधर उधर फ़िसल जाता था। मेरे से रहा नहीं गया तो मैने लंड पकड़ कर बूर में घुसा डाला। लंड घुसते ही उसके मुँह से चीख निकल गई। लंड कच्चा था, पहली बार बूर का स्वाद चखा था। उसके सुपाड़े के रिन्ग की झिल्ली फ़ट गई थी। “क्या हुआ सन्दीप, डर गये क्या मेरी बूर से” मै उसकी चीख को समझ नहीं पाई थी। “चुप हो जाओ, मुझे लगती है, ये क्या हो गया है ? “कुछ नहीं, लगाओ ना, घुसेड़ो ना लंड अन्दर तक, प्लीज !” उसने मेरी बेकरारी देखी और सम्भल कर उसने थोड़ा सा बाहर निकल कर हिम्मत करके पूरा जोर लगा कर लंड धक्का मार कर पूरा घुसेड़ दिया। इस बार उसके साथ मेरी भी चीख निकल गई। सन्दीप रुक गया। “अब तुम्हें क्या हुआ?” बूर में से खून निकल पड़ा। पर उसकी नजर मेरे चेहरे पर थी, जहाँ से आंसू बह निकले थे। “रो क्यों रही है, लगी तो मुझे है, तुम क्यों रो रही हो?” “मेरी फ़ट गई है, हाय रे !” मै रो पड़ी। मुझे पता था कि झिल्ली होती है, पर फ़टती कैसे है यह आज पता चला। “पर मैने गाण्ड थोड़ी मारी है, जो तुम्हारी फ़ट गई है?” सन्दीप ने हैरानी से कहा। “अरे बूर की झिल्ली फ़ट गई है, गाण्ड नहीं फ़टी है, बस अब नहीं, उतरो मेरे ऊपर से !” उसे भी लंड में दर्द हो रहा था और मुझे भी बूर में दर्द हो रहा था। उसने लंड बूर से बाहर निकाला तो खून भी निकल पड़ा। मैने झट से पास में पड़ा कपड़ा उठाया और नीचे लगा दिया। खून देख कर सन्दीप घबरा गया। मैने उसे अपनी जानकारी के अनुसार उसे बताया तो वो शान्त हुआ। अब हमारे में चुदाई का जोश समाप्त हो गया था। हम दोनों ने बाथ रूम में जा कर सफ़ाई की। उसका लंड देखा तो सुपाड़े के रिन्ग से लगी स्किन अलग हो गई थी और थोड़ी सी लालिमा आ गई थी। मैने भी सेनेटरी नेपकिन लगा लिया था। “सन्दीप हमें कितना मजा आ रहा था, पर ये अब क्या है… मुझे तो डर लग गया है।” “लगता है हमें सजा मिली है…” वो जाने के लिये तैयार था। हम दोनों का कुंवारापन जाता रहा था, अब हम दोनों मर्द और औरत बन चुके थे। जो अब चुदाई के लिये तैयार थे। सन्दीप जा चुका था। मै बिस्तर पर लेट गई। अपना दर्द किससे कहती। बूर में अब भी टीस उठ रही थी। रात देर तक जागती रही थी, फिर कब आंख लग गई पता ही नहीं चला। दूसरे दिन मेरे बूर का दर्द समाप्त हो चुका था। मुझमें फिर से वासना अंगड़ाईयां लेने लगी थी। आज सवेरे सन्दीप का कोई फोन नहीं आया। मैने किया तो फोन ओफ़ था। कॉलेज में भी वो नहीं दिखा। मै परेशान हो उठी। शाम को माइकल घर आया और मुझे परेशान देख कर पूछा, तो मैने उसे बताया कि सन्दीप मुझसे बात नहीं कर रहा है। उसने मुझे तसल्ली दी कि शायद वो यहाँ नहीं होगा, आ जायेगा, इन्तज़ार करो। माइकल अब रोज मेरा दिल बहलाने लगा। मजाक करता, मुझे हंसाता, सेक्सी जोक्स करता। मै धीरे धीरे माइकल की तरफ़ आकर्षित होने लगी। सन्दीप का ख्याल दिल में आता पर माइकल अपनी जिन्दादिली से उसे भुला देता था। एक शाम को मै अपना संयम तोड़ बैठी और माइकल से चुद गई। मै कॉलेज से आने के बाद बिस्तर पर लेटी माइकल और सन्दीप के बारे में सोच रही थी। अचानक मुझे माइकल सेक्सी लगने लगा। उसके नंगे जिस्म की मै कल्पना करने लगी। उससे चुदने का अनुभव मह्सूस करने लगी। मुझे माइकल की हर बात अब अच्छी लगने लगी। उसकी हंसी, उसकी बातें, उसका स्टाईल इत्यादि। मेरे मन में वासना करवटे लेने लगी। मुझे लगा कि अब माइकल से ही मै सन्तुष्ट हो पाऊंगी। माइकल हमेशा की तरह शाम को आया और एक आइस्क्रीम जो मुझे पसन्द थी, मुझे दी, ये उसका हमेशा का काम था। पर मेरी नजरें बदल चुकी थी। आते ही उसने एक सेक्सी मजाक किया जो मुझे अच्छा लगा। उसकी हर बात में मुझे सेक्स नजर आने लगा। आइस्क्रीम खाते खाते पिघल कर मेरी छाती पर गिर पड़ी। “हाय माइकल, मेरा कुर्ता गंदा हो गया !” माइकल ने तुरन्त एक कपड़ा गीला किया और मेरी छाती पर लगा कर धीरे से घिस दिया। दाग तो मिट गया पर मेरी चूची जो दब गई थी, उसने मन में आग लगा दी। जोर की गुदगुदी उठी और मेरे मुख से आह निकल पड़ी। “मजा आया ना?” उसने तुरन्त मजाक किया। “तुझे तो मारना चाहिये, साला गड़बड़ी करता है।” मैने यूँ ही नाराजगी जताई। “देख मारना ही है तो पूरा मारना, पूरा दाग साफ़ कर दूँ क्या ?” उसने फिर से मजाक किया। “माईकल, एक तो दबा दिया और अब मजाक कर रहा है !” ” ऐ स्वीटी, दबाने दे ना, तेरा क्या जायेगा, बस चमड़ी ही तो दबेगी, मुझे मजा आ जायेगा।” “अब देख माइकल, पिटेगा तू !” “अच्छा पिटना ही है तो दबा कर ही पिटूँ !” फिर उसने शरारत कर ही दी। माइकल ने आगे बढ़ कर मेरे बोबे दबा दिये, मै वासना की मारी, क्या कहती उसे, मेरी दिली इच्छा भी यही थी। मैने उसका हाथ दूर करने की असफ़ल चेष्टा की, फिर मन किया कि मजा आ रहा है तो उसे करने दिया। “छोटे हैं, पर कड़े हैं, स्वीटी हाय रे, देख तेरा कुछ नहीं बिगड़ा ना, मजा आया ना?” मेरी सांसें तेज हो गई। “हाय, ना कर अब, वर्ना सब गड़बड़ हो जायेगा रे !” मेरी धड़कनें तेज हो गई। माइकल शायद यह जानता था कि वो शुरू कर देगा तो मै मना नहीं करूंगी। “फिर भी तेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा, ये तो सिर्फ़ चमड़ी का खेल है, बस हमें रगड़ना ही तो है।” “माइकल, तू बड़ा खराब है, जिस्म को चमड़ी कह रहा है, ला तेरी नीचे की चमड़ी को मसल दूँ” मैने उसका वार उसी पर किया। उसका लंड जोर मार रहा था। मैने उसके जवाब का इन्तज़ार नहीं किया और उसका लंड पैन्ट के ऊपर से ही भींच लिया। उसके मुँह से आह निकल गई। उसने मुझे लिपटा कर चूमना शुरू कर दिया। उसके हाथ मेरे स्कर्ट के अन्दर घुस गए। मेरा नंगा बदन उसके कब्जे में आ गया, मेरे निपल को हौले से मसलने लगा। “हाय माइकल बस कर अब, वर्ना सब गड़बड़ हो जायेगा।” मेर जिस्म पिघलने लगा। मन में खुशी की तरन्गें उछाल मारने लगी। “सच मान यार तेरी चमड़ी को कुछ नहीं होगा, देखना वैसी की वैसी रहेगी।” मुझे वासना के साथ ये हंसी का खेल बहुत भा रहा था। “माइकल, मत बोल ना, देख चमड़ी को छूने से मस्ती आ रही है।” मुझे हंसी भी आ रही थी और मस्ती का रन्ग भी चढ़ रहा था। लग रहा था कि वो बस मेरे अंग दबाता ही जाये। “साली, मस्ती बढ़ती जा रही है, चल अपन चमड़ी की रगड़मपट्टी करें।” “देख मुझे और ना हंसा !” मेरी हंसी रोके नहीं रुक रही थी। उसने मेरा स्कर्ट पूरा उतार दिया, मेरा ऊपर का शरीर नंगा हो गया। “गोरी चमड़ी, चिकनी चमड़ी, क्या शेप है, यार तुम तो क्या फ़िगर वाली हो?” मै फिर से हंस पड़ी। “लगता है तुम चमड़ी का पीछा नहीं छोड़ने वाले, अब अपनी चमड़ी तो दिखाओ, उतारो अपने कपड़े !” उसको तो जैसे मौका चाहिये था। झट से पूरा नंगा हो गया और पहलवान का पोज बना कर खड़ा हो गया। “ये देखो मेरी सोलिड बॉडी, हूँ न मच्छर पहलवान?” “हाय रे, माइकल तुम भी ना !” मै खिलखिला कर हंस पड़ी, “अब बस करो मेरा पेट दुखने लगा है।” “क्यूँ, पसन्द नहीं आई ये बॉडी ?” “बस ऐसे ही खड़े रहो, तुम्हारा ये सब बहुत सुन्दर है।” उसका खड़ा हुआ तन्नाया लंड मुझे सुन्दर लगने लगा था। मैने आगे बढ़ कर उसका लंड थाम लिया। “नरम चमड़ी का कड़क लन्ड… माइकल देखो ना कितना मस्त है।” “नरम चमड़ी का कड़क लंड… क्या बात है, अब तुम्हारी नरम चमड़ी की प्यारी बूर की बारी है।” माइकल ने मुझे हंसते हंसाते बिस्तर पर लेटा दिया। और उसका लंड मेरी बूर पर दब गया। मन किया, साला मुझे चोद दे, लंड घुसेड़ दे, क्यूँ देर कर रहा है। “बोलो स्वीटी, जय हो ऊपर वाले की, बोलो ना !” “अब बस करो ना, कितना हंसाओगे, अच्छा जय ऊपर वाले की…बस” और उसी समय उसका लंड मेरी बूर में उतरता चला गया। मेरी बूर भी ऊपर जोर लगा कर लंड को निगलने लगी। तेज मीठी सी मस्ती वाली गुदगुदी उठी। मुझे हैरानी हुई कि मुझे बिलकुल दर्द नहीं हुआ, बल्कि मजा आया। मेरे दिल में ख्याल आया कि दर्द और मजा तो सब अपने अन्दर ही निहित है। कल दर्द था यहीं पर, आज स्वर्ग सी मिठास है, मुझे सन्दीप या माइकल की क्या जरूरत है, मजा तो अन्दर ही है। बस चुदने के सॉलिड लंड चाहिये और एक भरोसे का मर्द। अपनी मस्ती खुद ही लूटो और मन करे उससे चुदाओ, क्यूँ किसी की लौंडी बन कर रहो। उसके धक्के बढ़ते गये, मै मस्त होने लगी। “तो फूल तो खिल चुका है, किसी ने चोदा है या खेल खेल में खिल गई?” मै उसका इशारा समझ रही थी, पर मुझे ये समझ में आ गया था कि मजा तो लंड में है माईकल में नहीं। “मजा तो खिले फूल में है ना, भरपूर मजा मिलेगा ना।” उसका लंड बूर में पूरा समेटते हुये बोली। “मजा आ रहा है ना चमड़ी रगड़ने में, ये सारा खेल ही इसका है डार्लिन्ग” उसने लंड पेलते हुए कहा। मेरी बूर पानी पानी हुई जा रही थी। मिठास चरम सीमा पर आ चुकी थी। मेरा बदन अब ऐंठने लगा था। मुझे लगा कि बूर पानी छोड़ने वाली है, बूर लपलपा उठी, सारी नसें खिंचने लगी। मै होश खोने लगी। और अन्जाने में मेरी बूर कसने लगी और पानी छोड़ दिया। “आह्ह माईकल, मेरी तो निकल गई, हाय, पानी निकल रहा है।” मेरा शरीर कसने लगा और झड़ने लगा। धीरे धीरे स्वर्ग सा आनन्द लेते हुए मै झड़ने के सुख का अह्सास अनुभव करने लगी। मेरा पानी निकल रहा था। पर माईकल के धक्के बन्द नहीं हुए। मेरा पूरा पानी निकलते ही उसने मुझे उल्टा लेटा दिया और और मेरे बूरड़ों की गोलाईयाँ हाथ से फ़ैला दी। और उसका लंड मेरी गाण्ड के छेद से टकरा गया। मुझे गुदगुदी सी लगी। पर अगले ही पल मै चीख उठी। उसका लंड गाण्ड में घुस चुका था। “माइकल बस, निकाल लो, मर जाऊंगी !” “यार चमड़ी है, कुछ नहीं होगा, कुछ देर में फ़ैल जायेगी, शान्त रहो।” उसका दूसरा धक्का मुझे फिर से हिला गया। मेरी गाण्ड में जलन होने लगी। पर वो रुका नहीं। मैने कस कर अपना मुँह बन्द कर लिया, वो जोर लगा कर गाण्ड चोद रहा था। वैसे तो मेरी गाण्ड का छेद बहुत नरम था पर उसमे कोई लंड पहली बार घुसा था। कुछ देर धक्के मारने के बाद उसके लंड ने माल छोड़ दिया और मेरी गाण्ड में ही पूरा वीर्य भर दिया। जलन में वीर्य ने मरहम का काम किया। थोड़ा चिकनापन गाण्ड में लगा। उसका लंड बाहर आ गया। वह तुरंत उठा और कराह उठा। उसका लंड गाण्ड मारने से जगह जगह से छिल गया था, चमड़ी फ़ट गई थी। मेरी गाण्ड में भी जलन हो रही थी। हम दोनों ने बाथ रूम में पानी से सब साफ़ कर लिया। मुझे ज्यादा नहीं लगी थी, बस हल्की सी सूजन आ गई थी। माइकल ने मुझसे बोरोप्लस ले कर मेरी गान्ड में लगा दी और अपने लंड में लगाने लगा। “स्वीटी रुकना मै अभी आया।” मै बिस्तर पर लेट गई और आज की चुदाई के बारे में सोचने लगी। फिर मुझे हंसी भी आने लगी। “क्यों हंसी तुम?” माईकल रात का खाना ले आया और मेज़ पर लगाने लगा। “हंसी क्यों ना आये, यार तुम्हारे इस चमड़ी के खेल में अपनी तो सारी चमड़ी फ़ट गई।” मै खिलखिला कर हंसी। “हा यार, मेरे तो लंड की माँ चुद गई।” मैने उसके होंठों पर अंगुली रख दी। “गाली नहीं, समझे…” हम फिर से हंस पड़े । वो मेरे टोकने से शरमा गया और सॉरी कहा। “सन्दीप के बारे में मै कल पता करूंगा।” माईकल ने मुझे दिलासा दिया। पर अब सन्दीप किसे चाहिये था। “रहने दो ना, अब तो तुम ही मुझे प्यारे लगने लगे हो।” “नहीं, मुझे पता है, तुम्हें एक लंड और चाहिये… और शायद और भी ज्यादा…” माइकल कह कर हंस पड़ा। क्या इसे मेरे मन की बात मालूम हो गई है या ये ऐसे ही कह रहा है। “अच्छा तुम्हें और बूर नहीं चाहिये क्या ? किसी को पटाऊँ क्या ?” दोनों ने एक दूसरे को पहले तो गहरी नजरों से देखा, फिर ठहाको से कमरा गून्ज उठा। शायद हम जवानी का तकाजा समझ गये थे।

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