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खेल-खेल में मै उसकि बूर में उंगली कर देता था

खेल-खेल में मै उसकि बूर में उंगली कर देता था

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मेरा नाम अमित है, घर में मुझे अमी कहते हैं। कानपुर का रहने वाला हूँ। मै 22 साल का हूँ.. मेरे घर में मम्मी-पापा और मेरी बड़ी दी रहती हैं। मेरी दी जॉब करती हैं और पापा बैंक में जॉब करते हैं।

मै दिल्ली में JNU यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग कर रहा हूँ। यह कहानी मेरी और मेरी बहन के बीच कि है, मेरी बहन से आशय मौसी कि बेटी से है। मेरी मौसी कि लड़कि 19 साल कि है, वो देखने में एक मस्त माल है, उसका नाम प्रिया है, वो अभी 12 वीं में पढ़ रही है और कॉम्पिटीटिव एग्जाम कि तैयारी भी कर रही है। मेरी मौसी कि फैमिली बनारस में रहती है। मेरा एक सेमस्टर खत्म हुआ और मै घर जाने वाला था। जैसे ही मै कानपुर में अपने घर पहुँचा और माँ-पापा और दी से मिला.. सब बहुत खुश हुए, हम सबने साथ में बैठ कर खूब बातें कि। शाम को मेरी माँ के पास मेरी मौसी का फोन आया, वो बोलने लगीं- अमी आया हुआ है क्या? अमी मेरे घर का नाम है। तो माँ बोलीं- हाँ.. मौसी ने मुझे उनके घर भेजने को बोला क्योंकि वो अपनी बेटी को मुझसे पढ़वाना चाहती थीं और प्रिया भी इंजीनियरिंग करने के लिए बोल रही थी। इस तरह मौसी ने मुझे अपने घर बुलवा लिया और में अगले दिन बनारस पहुँच गया। मै मौसी के घर पहुँचा तो सबसे मिला और सबने अच्छे से मेरा स्वागत किया। हम सभी ने साथ में खाना खाया। शाम को प्रिया स्कूल से घर आई तो मै उसे देखता रह गया। वो भरपूर जवान हो गई थी। उसका बदन काफी भर गया था। उसको मै लगभग 4 साल बाद देख रहा था। वो आई और मेरे गले से लग गई। जैसे ही वो मेरे सीने से लगी.. मेरा दिमाग़ खराब हो गया और मेरे लण्ड राजा को कुछ होने लगा ओर वो उछलने लगे। जब मैने 4 साल पहले उसे देखा था.. तब उसका फिगर कुछ ख़ास नहीं था लेकिन अब वो जवान हो गई थी.. उसका फिगर गदराया हुआ हो गया था। अब वो 32-28-32 कि पूरी चलती-फिरती आयशा टकिया जैसी माल लगने लगी थी। हम सब साथ में बैठे और बातें करने लगे। फिर रात हो गई, हम सभी ने खाना खा लिया और सब सोने चले गए। मै छत पर चला गया क्योंकि मुझे ख़ाने के बाद सिगरेट पीने कि आदत थी। मैने ध्यान नहीं दिया कि प्रिया भी मेरे पीछे-पीछे छत पर आ गई है। जैसे ही मैने सिगरेट जलाई वो पीछे से आगे आ गई और गुस्सा करने लगी। मैने उसको शांत किया और हम बैठ कर बातें करने लगे। हम बातें करते-करते बचपन कि यादों में पहुँच गए। हम बचपन से ही साथ खेलते थे और खेल-खेल में मै उसकि बूर में उंगली कर देता था.. तो कभी उसकि गांड के छेद में उंगली कर देता था। इन सबसे उसको भी मज़ा आता था.. कभी-कभी वो मेरा लण्ड भी चूसती थी। एक बार मैने उसकि चड्डी उतार कर अपना छोटा सा लण्ड उसकि बूर में डालने कि भी बहुत कोशिश कि थी लेकिन अन्दर नहीं गया था। इन सब बातों को याद करते हुए मैने उससे पूछा- याद है कि हम क्या खेल खेलते थे? तो वो शर्मा गई और बोलने लगी- भैया तब हम बच्चे थे और वो सब ग़लत था। मैने उससे पूछा- वही खेल फिर से खेलना चाहोगी? वो मना करने लगी और बोलने लगी- नो.. अब करोगे तो मम्मी को बता दूँगी। मै डर गया और चुप हो गया। वो पूछने लगी- क्या हुआ? तो मैने कहा- मै कल ही वापस चला जाऊँगा। अब वो मुझे मनाने लगी। मैने उससे बोला- मै एक ही शर्त पर रुकूँगा। वो मान गई तो मै झट से उठा ओर मैने अपना लंबा और काफी मोटा फनफनाता हुआ खड़ा लण्ड निकाल कर खड़ा हो गया। उसने मुँह फेर लिया और बोलने लगी- पहले इसको अन्दर करो। मैने बोला- तुमने प्रॉमिस किया है। अब वो कुछ नहीं बोल सकि। मैने झट से अपना लण्ड उसके मुँह में डाल दिया और लण्ड डालते ही मुझे जन्नत हासिल हो गई। अब मै अपने लण्ड को उसके गले के अन्दर तक उतार कर उसके मुँह को चोदने लगा। ‘उघह.. उघह..’ कि आवाजें आने लगीं। उसके मुँह से उसका थूक निकल रहा था पर मै रुका नहीं और मै उसके मुँह को चोदता रहा। उससे सांस नहीं ली जा रही थी और वो मुझे धक्का मार रही थी, पर मैने उसका सर जोर से पकड़ा हुआ था। वो कुछ नहीं कर पा रही थी। कुछ मिनट चोदने के बाद उसको थोड़ा मजा आने लगा। अब उसने मुझे धकेलना बंद कर दिया था और खुद मजे से लौड़ा चूसने लगी थी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.. मै झड़ने वाला था.. पर मैने उसको बताया नहीं और उसका सर ज़ोर से पकड़ के दबाने लगा। अगले कुछ पलों में मैने जोर से पिचकारी मारी और उसके गले के अन्दर झड़ गया। उसको उल्टी आने वाली थी.. पर मैने उसको पीने को बोला। वो बड़ी मुश्किल से माल को पी पाई.. और अब मै उसके साइड में बैठ गया। फिर कुछ पल बाद वो वहाँ से भाग गई और मै छत पर ही सो गया। घर में गर्मी बहुत थी.. इसलिए जब मै सुबह उठ कर नीचे गया तो मुझे डर था कि कहीं प्रिया ने सब बता ना दिया हो, पर थोड़ी देर घर का माहौल देख कर मै समझ गया कि उसने नहीं बताया है। अब मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया कि उसको मै अब चोद भी सकता हूँ.. पर कैसे.. ये अभी मुझे देखना था। मुझे कोई मौका ही नहीं मिल रहा था। मुझे अब घर पर रहते हुए 6 दिन हो गए थे और रोज़ मै छत पर उसका अपना लण्ड चुसाता और उसको अपना माल पिलाता था। एक दिन जब वो रात को मेरा लण्ड चूस रही थी.. तो मैने उसको बोला- मै तुम्हें चोदना चाहता हूँ। वो मना करने लगी.. मैने उसको बहुत मनाया पर वो नहीं मानी। अगले दिन सुबह जब मै उठा तो देखा कि मौसी-मौसा तैयार हो रहे थे, वे कहीं जाने कि बात कर रहे थे। मैने मौसी से पूछा- आप कहाँ जा रही हो? तो वो बोलीं- मै और तेरे मौसा कहीं काम से जा रहे हैं.. हम लोग कल आ जाएँगे। यह सुनते ही मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा और मै पागलों कि तरह खुश होने लगा। वो बोलीं- बेटा प्रिया के एग्जाम पास आ रहे हैं.. उसका अच्छे से पढ़ाना। मैने बोला- जी.. आज सब कुछ अच्छे से पढ़ाऊँगा। थोड़ी देर बाद वो लोग चले गए और मै नहाने चला गया। जब मै बाहर आया तो प्रिया ने ब्रेकफास्ट तैयार करके रखा था और वो मेरा इंतज़ार कर रही थी। मै गया और खाने लगा। मै सोचने लगा बेटा अमी.. इससे अच्छा चान्स नहीं मिलेगा.. अपनी बहन को चोदने का.. चोद दे आज.. कर डाल अपनी दिल कि तमन्ना पूरी.. और बस मै प्लान बनाने लगा। मैने उससे पूछा- जब मै तुमको अपना लण्ड चुसाता हूँ.. तो तुमको कैसा लगता है? वो कुछ नहीं बोली.. मैने उससे फिर पूछा.. पर इस बार वो उठी और अपने कमरे में चली गई। मै उसके पीछे-पीछे वहाँ पहुँच गया, वो बिस्तर पर उल्टी लेटी थी.. उसकि 32 साइज़ कि उभरी हुई गांड देख कर मेरा लण्ड फनफनाने लगा। मुझसे रुका नहीं गया.. मैने जाते ही उसकि गांड पकड़ ली और सहलाने लगा। वो चौंक गई और उसने पीछे देखा। वो बोली- भैया.. यह ग़लत है, मै आपको राखी बांधती हूँ.. आप मेरे भाई हैं। तो मै झट से बोला- मै तुझे मंगलसूत्र बाँध देता हूँ.. तो तू मेरी बीवी बन जाएगी.. तब तो मुझे चोदने देगी? वो इस पर कुछ नहीं बोली और चुपचाप लेटी रही। उसका इशारा सीधा था.. उसको भी मज़ा आ रहा था। मैने देर ना करते हुए एक हाथ उसकि गांड दबाता रहा और दूसरे हाथ से उसके 34डी के चूचे दबाने लगा तो उसके मुँह से आवाज़ें निकलने लगीं ‘अहह आहहहह.. अहह अहह.. उम्म्म्म उम्म्म्म..’ मै रूका नहीं.. मैने उसको सीधा किया और उसके होंठों पर अपने होंठों को रख कर चूसने लगा। पहले तो वो मेरा साथ नहीं दे रही थी.. पर थोड़ी देर बाद वो भी साथ देनी लगी। मै उसके होंठों के साथ उसकि गर्दन को भी चूम रहा था.. जो उससे और अधिक मदहोश कर रहा था। मैने चुपके से अपना पैन्ट उतार दिया और चड्डी में आ गया। अब मैने उसके हाथ में अपना लण्ड थमा दिया। उसने झट से पकड़ लिया और हिलाने लगी। मेरा लण्ड बहुत टाइट हो गया था और पूरा खड़ा हो गया था। मैने उसको खड़ा किया और उसकि सलवार उतार दी। वो ब्लैक पैन्टी में क्या मस्त लग रही थी.. उसकि फूली हुई बूर बहुत सुंदर लग रही थी और उसकि गांड का तो क्या कहना। मैने उसकि बूर को जैसे ही छुआ वो उछल पड़ी और उसके मुँह से ‘उउइ.. माँआ..’ कि आवाज़ निकली। मैने उसका कुरता भी उतार दिया, वो सिर्फ़ ब्लैक पैन्टी और पिंक ब्रा में मेरे सामने खड़ी शर्मा रही थी, मै पागलों कि तरह उसको चूम और चाट रहा था। मैने उसको अपना लण्ड चूसने को कहा.. वो बिना कुछ बोले नीचे बैठ गई और मेरा लण्ड चूसने लगी, कुछ ही पलों में वो मेरा लण्ड लॉलीपॉप कि तरह चूस रही थी। वो बिल्कुल एक एक्सपर्ट रंडी कि तरह लौड़ा चूस रही थी, मैने उससे पूछा- इससे पहले मेरे अलावा किसी और का भी चूसा है? तो वो कुछ नहीं बोली और चूसती रही। फिर मैने उसकि पैन्टी उतारी और हम 69 कि पोज़िशन में आ गए। अब मै उसकि बूर चाट रहा था। हाय.. क्या महक थी यार.. मजा आ गया। उसकि बूर में से नमकिन पानी निकलने लगा, मै वो चाट गया। फिर मैने उसको सीधा लेटाया और उसकि गांड के नीचे एक तकिया लगा दिया। उसकि गांड उठ गई.. और बिल्कुल मेरे सामने आ गई थी। मैने उससे फिर पूछा- आज तक किसी से चुदवाया है? तो उसने अपना मुँह नीचे कर लिया। मैने सोचा कि मुझे क्या.. मुझे तो बूर मिल रही थी.. जिसको मैने बचपन में नहीं चोद पाया था। मैने हल्का सा थूक अपने लण्ड पर लगाया और उसकि बूर पर भी हल्का सा थूका, मेरे थूक से उसकि बूर चमकने लगी। अब मैने देर ना करते हुए अपना लण्ड उसकि बूर पर रखा और रगड़ने लगा। वो मदहोश होने लगी और झट से बोली- अब डाल भी दो.. मत तड़पाओ। मैने हल्का सा धक्का मारा.. उसकि तो मानो जान निकल गई, वो चिल्लाने लगी बोली- निकाल लो भैया.. बहुत मोटा है। मैने कुछ नहीं सुना.. बस वैसे ही लेटा रहा.. थोड़ा दर्द कम होते ही वो शांत हुई तो मैने एक जोरदार झटका फिर से मारा और इस बार मेरा आधा लण्ड अन्दर चला गया। उसकि बूर से पानी गिरने लगा। वो डर गई और रोने लगी। बोली- भैया आपने मेरी बूर फाड़ दी.. अब क्या होगा? मैने उसको बोला- कुछ नहीं होगा.. पहली बार जब चुदाई करते हैं तब ऐसा होता है। वो वो शांत हुई और मै धीरे-धीरे उसको चोदने लगा। कुछ धक्कों के बाद वो भी गांड उठा-उठा कर बूर चुदवाने लगी और ‘आआहह.. आह्ह्ह्ह उम्म्म्म.. ओह यस..’ करने लगी। उसकि चुदाई से ‘ठाप.. ठप..’ कि आवाज़ें कमरे में गूँजने लगीं, वो मस्त होकर चुदवा रही थी.. पर मै मौके के इंतज़ार में था कि कब मै अगला धक्का दूँ। मैने हल्का सा रुक कर पूरी जोर से धक्का मार दिया, वो पगला गई और ज़ोर से रोने लगी। मेरा लंबा और मोटा लण्ड उसकि पूरी बूर को फाड़ता हुआ अन्दर जड़ तक घुस चुका था। वो दर्द से काँपने लगी और बेहोश हो गई। मै उसको चोदता रहा.. रुका ही नहीं। मेरे अन्दर चुदाई का भूत घुस चुका था, उसकि बूर का भोसड़ा बनाने का कम चालू था, मै लगातार उसे चोद रहा था। कुछ पलों के बाद जब उसको होश आया वो फिर रोने लगी.. पर मैने एक नहीं सुनी और मै लगातार चोदता रहा। मुझे उसको चोदते हुए काफी देर हो गई थी। वो इस बीच झड़ चुकि थी, अब शायद मै भी झड़ने वाला था, मैने अपना लण्ड उसकि बूर से निकाला और उसके मुँह में घुसा दिया। अगले ही पल मै झड़ गया और उसने बिना कुछ बोले मेरा स्पर्म पी लिया। अब मै थक कर उसके बगल में लेट गया और उसके मम्मों से खेलने लगा। वो बोली- भैया एक बात बताऊँ? मैने बोला- हाँ बोलो। वो बोली- भैया आप बहुत अच्छा चोदते हो। मैने उससे पूछा- बहुत अच्छा मतलब.. तुम किसी और से भी चुदवा चुकि हो? वो बोली- हाँ भैया मै एक दिन घर में अकेली थी.. मम्मी नहीं थीं और पापा ऑफिस गए थे। दोपहर को वो लंच करने घर आए। पापा जब भी आते हैं.. तो मम्मी को चोद कर वापस जाते हैं। उस दिन मम्मी नहीं थी उनकि नज़र मुझ पर पड़ी और उन्होंने मुझे ज़बरदस्ती चोद दिया और बोला- मम्मी को बताया तो जान से मार दूँगा। फिर जब भी उनका मन करता है.. तो वो मुझे चोद देते हैं और मै कुछ नहीं बोल पाती हूँ। लेकिन उनका बहुत पतला और छोटा सा है। मै उसको देखता ही रह गया। मैने अपनी बहन कि रात को भी चोदा पूरी रात चोदा.. तेल लगा कर चोदा। मैने उसकि बूर को 10 बजे से चोदना स्टार्ट किया और सुबह 5 बजे तक चोदा। सुबह 7 बजे मौसी लोग आ गए। दोस्तो, यह थी मेरी और मेरी बहन कि चुदाई कि कहानी। कैसी लगी आपको.. प्लीज़ कमेंट्स में ज़रूर बताएं.. मै फिर आऊँगा अपनी नई कहानी के साथ कि कैसे मैने प्रिया कि गांड मारी और कैसे मैने और मौसा ने मिलकर उसकि चुदाई कि

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