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चुद गई दुलारी देवी

चुद गई दुलारी देवी

दोस्तो, मेरा नाम रवि हैं। मै मुंबई का रहने वाला हूँ। मै आप लोगों को अपनी दुलारी माँ कि कहानी सुना रहा हूँ। जो मै सोच भी नहीं सकता था वो मुझे आजमाने को मिला हैं। क्या बताऊँ दोस्तो !

मै एक चाल में रहने वाला लड़का हूँ, 9वी तक ही पढ़ा हूँ ! मै पढ़ाई में कमजोर था लेकिन सेक्स में नहीं ! अब मेरी उम्र 23 साल हैं, मेरे पिताजी कुछ काम नहीं करते हैंं, बस शराब पीते हैंं रोज़ ! इसी वजह से शायद उनमें अब सेक्स नहीं रहा हैं, इसी वजह से मेरी माँ ने दूसरों के साथ सबंध बनाये हैंं। मेरी माँ सुबह काम पर जाती हैं और दोपहर को घर आती हैं और शाम को जाती तो रात को आठ बजे आती हैं।

बात उस समय कि हैं जब मै थोड़ा बीमार था तो मै काम से दोपहर को घर आया था और घर में मैने देखा कि आज माँ घर आई नहीं थी। तो मैने सोचा कि उसे किसी काम से देर हो गई होगी। मगर ऐसा नहीं हुआ। मेरी माँ तो हमारे पड़ोसी अंकल के घर में थी। उनका दरवाजा बंद देखकर मुझे शक हुआ कि कुछ तो गड़बड़ हैं। मैने उनकि खिड़कि के छेद से देखा कि मेरी माँ और विशाल अंकल दोनों एक दूसरे कि बाहों में हैंं। मेरी माँ कि उम्र पचास साल और अंकल कि उम्र चालीस साल होगी। फिर भी वो एक दूसरे के साथ सेक्स कर रहे थे।

यह देखकर मुझे बहुत बुरा लगा और मै घर जाकर सो गया। उस रात को मै सो नहीं पाया। मैने यह बात अपने दोस्त से कही कि मेरी माँ और अंकल के बीच सेक्स सम्बन्ध होता हैं तो उसने कहा कि हम दोनों नजर रखेंगे।

मैने भी हाँ कर दी !

चार-पाँच दिन बाद उसने फोन कर के मुझे बताया कि मेरी माँ और अंकल मेरी ही घर में हैंं और मुझे घर आने को कहा। मै और मेरा दोस्त मेरी घर के खिड़कि से देखने लगे। मेरी माँ पूरी कि पूरी नंगी थी विशाल अंकल के साथ ! अंकल भी पूरा नंगा था। मुझे बहुत ही गुस्सा आया लेकिन दोस्त ने रोका और मुझे चुपचाप देखने को कहा और मै देखता रहा।

मेरी माँ अंकल का लन्ड चूस रही थी और अंकल चुसवा रहा था। दस मिनट बाद उसने सारा वीर्य उसके मुँह में डाल दिया और कहने लगा- ले ले जोर से चूस ले ! पी ले … तेरे मर्द में ऐसा रस नहीं मिलेगा !

माँ ने कहा- इसीलिए तेरा पीती हूँ ना मेरे जानू ! तेरा लन्ड तो लोहा हैं ! ऐसा मजा कही नहीं मिलता हैं !

फिर कुछ देर बाद वो दोनों सिक्स नाइन कि अवस्था में आ गए। अंकल माँ कि बूर चाट चाट कर पानी ला रहा था, माँ भी लन्ड को चोकोबार कि तरह चूसे जा रही थी। इतने में मेरा और मेरे दोस्त का लन्ड खड़ा कब हुआ, पता ही नहीं चला !

फिर अंकल ने माँ को लिटा कर उसकि टाँगें कंधे पर लेकर अपना लन्ड बूर पर रख दिया और बूर में पेलने लगा। उसका साथ इंच का लन्ड बूर को फाड़ रहा था। साल हरामी जोर जोर के धक्के मारने लगा। दस बारह मिनट में वो भी थक गया, वो माँ को पूरी तरह सन्तुष्ट नहीं कर सका, यह हम जान गए थे।

उनका खेल ख़त्म हो गया और वो कपड़े पहन रहे थे। हम वहाँ से चले गए। फ़िर अंकल चले गए और माँ सो गई।

मेरे दोस्त ने कहा- हम भी अंकल कि बीवी को बताकर उसे भी हम चोदते हैंं।

मैने मना किया।

फिर उसे एक मस्ती सूझी, उसने कहा- आज मै तेरे घर सोने आता हूँ।

मैने हाँ कर दी।

रात को नौ बजे वो खाना खाकर आया। मेरा बाप तो घर पर सोता नहीं हैं। हम टी वी देखकर सो गए- मै, मेरा दोस्त और माँ !

रात को बारह बजे मेरे दोस्त ने मुझे जगाया और मुझे कहा- मै क्या करता हूँ, तू सिर्फ देख ! और मुझे चुप रहने को कहा उसने !

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वो माँ के पास जाकर लेट गया और माँ के बदन पर अपना हाथ फेरने लगा। माँ सोई हुई थी और वो माँ को गर्म करने लगा था। वो माँ के मम्मों पर हाथ फेर रहा था, मै देख रहा था। उसने माँ का ब्लाऊज खोल दिया और मम्मे चूसने लगा। मैने भी हिम्मत कि और माँ कि दूसरी बाजू में जाकर दूसरा मम्मा चूसने लगा।

क्या मम्मे हैंं ! वाह ! मै पहली बार चूस रहा था।

इतने में मेरी माँ जाग गई और एकदम से घबरा गई और कहा- तुम यह क्या कर रहे हो ?

मेरे दोस्त ने कहा- हमारा भी लन्ड चूस कर देखो ! उस अंकल से बहुत अच्छा हैं ! उससे चुदवाती हो तो हमने क्या पाप किया हैं ?

माँ ने कहा- तुम्हें सब पता हैं तो फिर क्या डर हैं मुझे !

यह सुनकर मेरे तो होश ही गुल हो गए। मेरे दोस्त ने माँ कि साड़ी खोली। अब माँ सिर्फ और सिर्फ पेटीकोट में थी, वो भी मैने नाड़ा खोलकर नीचे खींच दिया। अब वो सिर्फ पैन्टी में थी। उसके ऊपर से मेरे दोस्त ने चाटना शुरु किया। उसकि बूर से पानी आने लगा। फिर मैने अपनी पैंट उतार दी। मै और दोस्त सिर्फ अन्डरवीयर पहने थे। फिर वो बूर चाटने लगा और मैने मुँह में लन्ड डाला। वो जोर से चूसने लगी। मै उसके मुँह में चोदने लगा। उधर वो अन्डरवीयर उतार कर माँ कि बूर में लन्ड डालने लगा था। माँ लेटे लेटे अपनी टाँगें फैलाने लगी और उसने आठ इंच का लन्ड माँ कि बूर में पेल दिया।

फिर माँ ने मुझे कहा- तुम मेरी गांड में लन्ड डालो !

मैने दोस्त को गांड मारने को कहा, मै तो बूर मारूँगा ! माँ कि गांड भी मस्त हैं

फिर उसने माँ को उठा कर बिस्तर पर ऐसे लिटाया कि मै बूर के सामने था तो वो गांड के पीछे !

मुझे उसने कहा- सोच मत ! मार हथोड़ा !

फिर मैने भी नंगा होकर मेरा सात इंच का लन्ड माँ कि बूर पर टिका दिया। मै मम्मे चूस कर बूर में लन्ड घुसाने कि कोशिश रहा था, वो आह आहा अह अ करने लगी।

मैने तो अभी लन्ड भी डाला नहीं फिर कैसे ?

मेरे दोस्त ने गांड भी मार दी थी। उसने तो पूरा का पूरा लन्ड गांड में घुसा डाला था ….

वो कहने लगी- जोर जोर से चोदो मुझे ! मै बहुत प्यासी हूँ लन्ड कि !

मैने भी जोर लगाना शुरु किया और जोर से बूर में पेल दिया। उसे इतना खुश कभी नहीं देखा मैने !

उस रात हमने उसकि खूब चुदाई कि। मैने सिर्फ बूर मारी, मेरे दोस्त ने उसके मुँह में, बूर और गांड को चार-पाँच बार चुदाई कि। फिर मै तो रात के तीन बजे ही सो गया लेकिन मेरे दोस्त ने माँ कि पाँच बजे तक चुदाई कि। इससे माँ भी खुश थी।

इस तरह मेरा दोस्त जब भी मौका मिलता हैं माँ कि चुदाई करता हैं। मेरी माँ अब उस विशाल से नहीं चुदती हैं बल्कि मेरे दोस्त विकि से चुदती रहती हैं !

यह मेरी बुरी मगर सच्ची कहानी आप लोगों को कैसे लगी, मुझे मेल करें और बताये !

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