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चूत चुदवाने की लत लग गई

Hindi sex kahani

​मेरा नाम संध्या रायहै। मै शिवान की रहने वाली हूँ। यह मेरी पहली चुदाई की कहानी है और उस समय की है जब मेरी जवानी पूरे जोश पर थी और न चाहते हुए भी मैने अपनी कुँवारी और छोटी सी चुत को फटवा कर भौसड़ा बनवा लिया। 

पहले मै अपने बारे में बता दूँ। मरी लम्बाई 5.5 है और फिगर 36-28-34, रंग साफ, लाल गाल, गुलाबी होंठ और कंटीले नैन। आप समझ ही गये होंगे कि मै बहुत ही सुन्दर हूँ। जब मै घर से निकलती तो सारे लड़कों की नजर मुझ पर रहती और मेरी चूचियों और मटकती गाण्ड को देखकर उनका लंड खड़े हुए बिन नहीं रह पाता। मै निकल जाती और वो लंड दबाते रह जाते। 

स्कूल में मेरा दो लड़कों से चक्कर था। उन्होंने भी मुझे चोदने की कोशिश की पर वो असफल रहे। मैने उन्हें सिर्फ चूमाचाटी और चूचियाँ दबाने की इजाजत दे रखी थी। 

हाँ, मुझे चूमाचाटी करना बहुत पसन्द है। वो ऐसे कि कोई मेरे गुलाबी होंठों को चूस चूस कर लाल कर दे। 

मेरी बुआ का लड़का है जो मेरी हम उम्र है। बचपन से ही वो हर बार छुट्टियों मै हमारे घर आता है। हम दोनों एक ही चादर में लिपट कर सोते थे पर जब हमारे दिल में कोई बुरा ख्याल नहीं था। 

धीरे-धीरे हम जवानी की तरफ बढ़ने लगे। मै स्कूल से कालेज में आ गई। दोस्तों ने मेरी चूचियाँ और गाण्ड खूब भींची जिससे वो भी अपने असली रूप में आ गई। फिर एक बार भईया घर आये और मुझे देखा तो देखते रह गये। उनकी नजर मेरी चूचियों और गाण्ड पर थी और उनका भी हाल वही हुआ जो और लड़कों का होता था यानि उनका भी लंड खड़ा हो गया। 

मै बोली- क्या हुआ भईया? 

“पायल, तुम तो बड़ी हो गई हो।” 

“यह तो है।” मेरी नजर उनके लंड की तरफ थी, मै मुस्कराते हुए बोली- आप भी तो बड़े हो गये ! 

और अन्दर आ गये। 

रात को सब सोने की तैयारी करने लगे। मै और भाई बचपन की तरह एक ही चारपाई पर लेट गये। पर अब हम जवान थे इसलिए महसूस होने लगा था कि एक जवान लड़का लड़की साथ लेटते हैं तो क्या होता है। 

मेरा भी चुदने का मन करने लगा पर चुप लेटी रही। थोड़ी देर बाद मुझे भाई के लंड के पास कुछ हिलता नजर आया। शायद वो मुठ मार रहे थे। मै भी अपनी चूचियों को दबाने लगी और चुत को रगड़ कर शान्त किया और सो गई। 

मै सुबह उठी और नहा-धो कर कालेज चली गई। दिन भर चुत में खुजली चलती रही।जब मै दो बजे कालेज से घर आई तो वो टीवी देख रहे थे। उन्होंने बनियान और लोअर पहना था, घर वाले बाहर गये हुए थे। 

मै उनकी तरफ देख कर मुस्कुराई और हाथ-मुँह धोने चली गई।मन अब भी चुदने को कर रहा था। मैने फिर चुत को शाँत किया और पानी से साफ किया। मैने लाल रंग का कमीज़-सलवार पहन लिए जिनमें से मेरी चूचियाँ और गाण्ड का उभार साफ दिख रहा था। कमीज़ के गले से चूचियों का कुछ हिस्सा बाहर था। 

मै भाई के पास आई वो अब भी टीवी देख रहे थे। उन्होंने मेरी तरफ देखा तो देखते ही रह गये और उनका लंड खड़ा हो गया। उन्होंने लंड छिपाने के लिए तकिया गोद में रख ली। 

मै सोफ़े पर उनके पास जाकर बैठ गई और बातें करने लगी। पता नहीं कब हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर बैठ गये। मेरी नजर उनके लंड पर थी, तकिया बातों-बातों में अलग हो गया था। 

भईया समझ गये कि मै उनके लंड को देख रही हूँ। 

“क्या देख रही हो?” 

मैने सिर नीचे कर लिया और बोली कुछ नहीं। 

भाई ने हाथ मेरे कन्धे पर रखा और बोला- कुछ तो देख रही हो? 

मै बोली- तुम क्या देखते हो मेरी तरफ? 

हम दोनों की साँसें और शरीर गर्म हो गये। 

भईया समझ गये कि मै चुदना चाहती हूँ। उन्होंने मेरी चूची पर हाथ रखा और बोले- मै तेरी इन्हें और मस्त गाण्ड को देखता हूँ।

“तो आप बता देते मै खुद अपनी चूचियाँ और गाण्ड आपके हाथों में दे देती।” मै हँसी और हाथ उनके गले में डाल दिये और गाल पर चुम्बन कर दिया। 

मै तो यही चाहती थी कि वो आज मेरी चुत की खुजली मिटा दें। उन्होंने मेरा सिर पकड़ा और अपने होंठ मेरे होंठों पर रखकर चूसने लगे। 

मुझे जैसे कोई करेन्ट लगा हो, मै सिहर गई और उनका साथ देने लगी। 

10-15 मिनट तक हम एक दूसरे के होंठ और जीभ को चूसते रहे। मेरी चुत से पानी निकलने लगा। मैने उन्हें गेट बन्द करने को बोला और वो गेट बन्द करके आ गए और मेरी चूचियों को दबाने लगे। मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी। 

उन्होंने मेरे कमीज़ को उतार दिया और ब्रा के ऊपर से चूचियोँ को मसलने और होंठो पर चुम्बन करने लगे। मेरा बुरा हाल था मै भी उन्हें चूम रही थी। 

फिर उन्होंने मेरी सलवार उतार दी और मैने उनकी बनियान और लोअर उतार दिया। अब मै ब्रा और पेन्टी में थी और वो अन्डरवीयर में। 

उनका लंड सीधा खड़ा था। मैने लंड पकडा और सहलाने लगी।उन्होंने मेरी ब्रा निकाल दी और चूचियों को चूसने और मसलने लगे। मेरे मुँह से लगातार सिसकारियाँ निकल रही थी। 

अब मुझसे नहीं रुका जा रहा था दिल कर रहा था बस पकड़कर लंड चुत में डाल लूँ। मैने उनका अन्डरवीयर उतार दिया। 

वाह क्या लंड था 6″ लम्बा और 1.5″ मोटा।मै घुटनों पर बैठ गई और लंड की आगे की खाल पीछे करके चुम्बन कर दिया, फिर मुँह में लेकर चूसने लगी। भईया आहें भर रहे थे। 

उन्होंने मुझे खड़ा किया और मेरी पेन्टी उतार दी। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे खड़े थे। 

भईया ने मुझे लिटा दिया और मेरे पैरों के बीच बैठकर मेरी चुत को सहलाने लगे। फिर उन्होने मेरी चुत को खोलकर जीभ लगा दी और हिलाने लगे। मुझे कितना मजा आ रहा था बता नहीं सकती। मै आँखे बन्द करके बस सिसकारियाँ ले रही थी। 

भईया मेरी चुत में जीभ फिराने लगे, मेरी तो जान ही निकलने लगी। 

फिर हम 69 की अवस्था में आ गये और एक दूसरे के अंगों को चूसने लगे। 

15-20 मिनट बाद मेरा पानी निकल गया, वो पूरा पानी चाट गये, बोले- पायल, मेरा निकलने बाला है। तुम सारा पी जाना। 

मैने लंड मुँह से निकाल दिया और वीर्य पीने मना कर दिया। 

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उन्होंने मुठ मारकर मेरी चूचियों पर डाल दिया और चाटने लगे।

मै बोली- तुम रात को लंड के साथ क्या कर रहे थे? 

भईया ने मेरी तरफ प्यार से देखा और बोले- पायल जान अगर घर में तेरी जैसी मस्त और सेक्सी बहन हो तो। मुठ मारे बगैर कैसे लंड शांत हो सकता है। 

“भईया, मैने भी तुम्हें देखकर चुत को रगड़ कर अपनी मुन्ऩी को चुप सुलाया।” 

“मै तो जान, तुम्हें कब से चोदने की सोच रहा था और बाथरूम में तेरी पेन्टी पहन कर मुठ मारता हूँ। 

“धत्त ! तुम तो बहुत कमीने हो।” 

“कमीना?” 

“कमीना तो तेरी गाण्ड और चूचियों ने बनाया है जिन्हें देखकर लंड बगैर कुछ बोले खड़ा हो जाता है और आज तू मिली है तो बगैर तेरी चुत फाड़े नहीं छोडूँगा। तेरी चुत का भौसड़ान बना दूँ तो कहना।” 

“तो मना कौन कर रहा है, लो चाहे भोसड़ा बनाओ या नाला, बस माँ मत बनाना।” कहते हुए मैने अपनी टागें फैला दी। 

भईया फिर मेरी चूचियों और चुत को चाटने लगे, अब मुझसे नहीं रुका गया, मै बोली- भईया अब तड़पाते ही रहोगे या चुत को फाड़ोगे भी? 

“जानू मै तो फाडूँगा ही, पर तुम्हें दर्द होगा।” 

“दर्द को छोड़ो, तुम बस अब चुत में अपना लंड डाल दो।” 

“ठीक है।” 

उन्होंने मेरी गाण्ड के नीचे तकिया लगारा और लंड को चुत के छेद पर रखा। 

मेरा दिल कर रहा था कि खुद ही लंड चुत में डाल लूँ और गाण्ड उपर उठाने लगी। 

भईया समझ गये कि मै तैयार हूँ और उन्होंने कमर पकडकर एक झटका मारा। उनका लगभग 3 इन्च लंड चुत में चला गया। मेरी न चाहते हुए भी चीख निकल गई- आ अ म मर गई ई . .भ भईया न निकालो ओ ! 

भईया ने मेरे हाथ पकड़े और होंठ अपने होंठों में दबा लिए। मेरी आवाज मुँह में ही रह गई। उन्होंने धीरे-धीरे पूरा लंड मेरी चुत में ठोक दिया। 

मै दर्द से तड़प रही थी और आँखों से आँसू निकल रहे थे। 

भईया थोड़ी देर रुके और चूचियों को मसलने लगे। 5 मिनट बाद मुझे कुछ राहत मिली और मै गाण्ड हिलाने लगी। 

फिर भईया ने कमर पकड़ी और झटके मारने लगे। 

मेरे मुँह से पता नहीं क्या-क्या निकल रहा था- कमीने ! पेन्टी में मुठ मारता है? ले अब मार। ले फाड़ मेरी चुत को ! लगा गाण्ड तक का जोर। देखती हूँ कितना दम है तेरे लौड़े में ! फ फाड़ ! ले बना भोसड़ा ! कुत्ते, बहन मत समझ, कुतिया समझ कर मार। 

“ले राण्ड झेल इसे !” 

कहते हुए तेज-तेज़ झटके मारने लगे। 

“बहुत उछल रही थी चुदने के लिए? ये ले !” 

और कन्धे पकड़ कर लगातार झटके मारने लगे। 

“कुत्ते मार ओ और तेज ज् आ ऊ ई आ अ और तेज फ् फाड़ ब् भोसड़ा कम् आन फ् फक मी फास्ट ओ यस स् हाँ ऐसे ही ओ और तेज बस थ थोडी द देर और कम आन फास्ट !” 

कहते हुए गाण्ड उछाल-उछाल कर साथ दे रही थी। 

14-20 मिनट बाद मेरा शरीर अकड़ने लगा और मैने भईया को कस कर पकड़ लिया। 

मै तो क्या बताऊँ बस ! मेरी चुत से पानी निकलने लगा। 

भईया ने मुझे अलग किया और 10-12 झटकों में मेरी चुत वीर्य से भर दी और निढाल होकर पीछे की ओर लेट गये। 

मै बैठ कर अपनी चुत को देखने लगी। 

मेरा पानी और वीर्य चुत से ऐसे निकल रहा था जैसे नदी बह रही हो। 

आज पहली बार चुत से इतना पानी निकला कि धार लग गई। मै पूरी सन्तुष्ट और खुश थी और सोच रही थी कि पहले क्यूँ नहीं चुदी मै ! 

मै उठी और भईया के ऊपर लेट गई और सॉरी बोला। 

“किसलिए?” 

“वो ! मैने आपको गाली दी।” 

“जान चुदाई में यह तो चलता ही है। गालियों से चोदने का जोश बढ़ता है !” कहते हुए मुझे चूमने लगे। 

घर वालों के आने का समय हो गया तो हम नहाकर तैयार हो गये। 

उसके बाद जब भी मौका मिलता हम चुदाई का खेल खेलते।

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