loading...

दस्ताने ए चूत चोदाई अपनी जुबानी

दस्ताने ए चूत चोदाई अपनी जुबानी

हेलो दोस्तो मैं रूबी कुमारी मैं आज अपनी कि चुदाई की एक सच्ची घटना पेस रही हु, मैं अपने चुत में लण्ड लिया कैसे मैं कहानी में बताने जा रही हु

मेरी उम्र इक्कीस साल हैं और में बहुत मस्त सेक्सी लगती हूँ. दोस्तों यह सब मुझे दूसरे लोग कहते हैं, में अपने मुहं से अपनी बढ़ाई नहीं करती और में जितनी सुंदर हूँ मेरे बूब्स भी उतने ही अच्छे हैं.

दोस्तों मेरे बूब्स का आकार 32-30-34 हैं मेरे बूब्स एकदम गोलमटोल गोरे बहुत ही आकर्षक लगते हैं जिसको देखकर अच्छे अच्छो के मुहं में पानी आ जाता हैं और इस वजह से मेरे घर के आसपास वाले लोग अक्सर मेरे भरे हुए गोरे कामुक बदन को बहुत ही घूरकर देखते रहते हैं और अब में सच बताऊँ तो मुझे उनका देखना अच्छा भी बहुत लगता हैं. दोस्तों अब में वो बातें बाद में बता दूंगी और सबसे पहले में आप सभी को अपनी उस सच्ची चुदाई की कहानी को सुनाना चाहती हूँ जिसके लिए आज में आप सभी चाहने वालों की सेवा में हाजिर हूँ.

दोस्तों यह घटना मेरे साथ तब घटी जब में अपने मामा के घर पंजाब गयी थी और वैसे में पहले भी वहां पर कई बार जा चुकी हूँ, लेकिन इस बार का सफर मेरे लिए इतना रंगीन होगा मुझे इसके बारे में बिल्कुल भी पता नहीं था. एक दिन में मामा के घर की छत पर अपनी बहन मामा जी की लड़की के साथ चली गयी और हम दोनों वहां पर बैठकर इधर उधर की बातें ही कर रहे थे कि तभी मेरी नज़र अचानक से पास वाली छत पर गयी.

मैने वहां पर एक लड़के को देखा वो लड़का लगातार ही मुझे घूरकर देख रहा था और दिखने में वो बहुत लंबा चौड़ा था. उसका रंग गोरा और दिखने में बहुत अच्छा लग रहा था. फिर जब कुछ देर बाद मैने दोबारा मुड़कर उसकी तरफ देखा तो में देखती ही रह गयी, क्योंकि वो अब मुझे देखकर मेरी तरफ मुस्कुरा रहा था. अब मैने भी उसकी तरफ एक बार थोड़ा सा मुस्कुरा दिया, लेकिन अब उसको देखकर मेरे तो पूरे शरीर में कुछ कुछ होने लगा था. फिर कुछ देर देखने और बातें करने के बाद हम दोनों वापस नीचे आ गये और रात को बातों ही बातों में मैने अपनी बहन से उस लड़के के बारे में पूछा तब मुझे पता चला कि उस लड़के का नाम रणवीर हैं और वो भी यहाँ पर अपनी बहन के घर छुट्टियों में आया हुआ था.

अब में उसके बारे में सोचकर मन ही मन खुश होने लगी थी, क्योंकि मुझे वो लड़का बहुत ही अच्छा लगा में उसकी तरफ ना जाने क्यों खिंची जा रही थी. ऐसा पता नहीं उसने मेरे ऊपर पहली बार में ही क्या जादू किया था कि मुझे अब हर जगह बस उसका चेहरा नजर आ रहा था. फिर में अगली सुबह यह बात सोचकर अकेले ही छत पर चली गयी कि शायद वो छत पर हो और दोस्तों आप मेरी किस्मत देखिए कि वो भी उस समय छत पर ही था.

अब वो मुझे देखकर मेरी तरफ मुस्कुरा गया और फिर उसने मुझे अपने पास बुलाया और वैसे मुझे भी तो उसी पल का इंतज़ार था. अब में तुरंत उसकी तरफ चुंबक की तरह खिंची चली गई और उसके बाद हम दोनों ने एक दूसरे से बहुत देर तक अपने अपने बारे में बताते हुए बातें की. उसने मुझे अपने बारे में बताया और में उसको अपने बारे में ऐसे खुश होकर बता रही थी कि जैसे में उसको बहुत समय से जानती हूँ. उसके साथ मिलना मुझे बहुत अच्छा लगा. अब हम दोनों बहुत हंस हंसकर बातें मज़े कर रहे थे और थोड़ी ही देर में हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन चुके थे. में उसके साथ बड़ी खुश थी और शायद उसके मन का भी यही हाल था. फिर ऐसे ही हमारे दो दिन गुज़र गये और तीसरे दिन शाम के समय जब हम दोनों बैठकर छत पर बातें कर रहे थे.

फिर उसी समय उसने मुझसे पूरी तरह खुलकर कहा कि में उसको बहुत अच्छी लगती हूँ और वो मेरे साथ कुछ समय अकेले में बिताना चाहता हैं. अब में उसकी बात सुनकर खुश बहुत थी, लेकिन मैने अभी तक उसको अपनी तरफ से कोई भी जवाब नहीं दिया था. फिर उसने उसी समय मुझे बताया कि आज रात को उसके सभी घर वाले किसी काम से बाहर जा रहे हैं और वो सब कल रात से पहले वापस नहीं आएँगे और उसने मुझे उसी रात को अपने घर पर बुला लिया.

पहले तो मैने नाटक करते हुए साफ मना किया, लेकिन फिर मैने उसको मिलने आने के लिए हाँ कर दिया, क्योंकि दोस्तों में भी शायद मन ही मन यही चाहती थी. दोस्तों वो सर्दियों के दिन होने की वजह से रात का अँधेरा जल्दी और बहुत गहरा होता था, इसलिए शाम को सात बजे ही तेज अंधेरा हो गया था और में आसपास और अपने घर वालो से छुपकर उसके घर चली गयी. अब मैने पहुंचकर देखा कि वो उस समय नहाकर बाथरूम से बाहर निकलकर दरवाजा खोल रहा था और उसने उस समय सिर्फ़ बनियान और छोटी पेंट पहनी हुई थी. फिर उसके दरवाजा खोलकर मुझे अंदर लेते ही तुरंत ही दरवाज़ा बंद करके मेरी तरफ मुस्कुराकर मुझे अंदर चलकर बैठने को कहा.

दोस्तों उस समय उसको देखकर मेरा तो पूरा बदन गरम हो चुका था, क्योंकि मेरी आँखों के सामने उसका गोरा गठीला बदन था जो मुझे अपनी तरफ आकर्षित कर रहा था. दोस्तों शायद वो मेरे मन की बात को भी ठीक तरह से समझ चुका था कि उसके खुले बदन को देखकर उस समय मेरे मन में क्या चल रहा था? दोस्तों कुछ देर तक पहले तो वो मुझे अपनी बड़े ही अजीब नजर से देख रहा था और फिर वो कुछ देर बाद मेरे पास आकर बैठ गया और बातों ही बातों में उसने मुझसे खुलकर पूछ ही लिया क्या मैने कभी किसी के साथ सेक्स किया हैं?

अब मैने उसको कहा कि नहीं मैने ऐसा कुछ भी कभी नहीं किया और अब उसने मुझसे बोला कि जब से मैने तुम्हे देखा हैं तब से ना जाने मुझे क्या हो रहा हैं? और फिर उसने मुझसे पूछा क्या वो मुझे एक बार चूम सकता हैं? दोस्तों मैने तो पहले उसको मना कर दिया और फिर वो मुझसे कहने लगा कि देखो कुछ दिनों में हम दोनों वापस अपने अपने घर चले जाएँगे.

फिर किसी को क्या पता चल रहा हैं कि हमारे बीच में क्या क्या हुआ हैं, इसमें डरने की क्या बात हैं? क्या तुम्हारा कभी भी यह सब करने का मन नहीं करता कि कोई लड़का तुम्हारे बदन को सहलाए और तुम्हे वो मज़े दे जिसके लिए तुम्हारा यह गोरा सुंदर बदन बना हैं.

दोस्तों में उसकी आखों में आंखे डाले उसकी वो बातें सुनती रही और मैने कोई जवाब नहीं दिया और बिल्कुल भी विरोध नहीं किया. अब उसकी आँखों और उन बातों में एक अजीब सा नशा था और इसलिए वो सब सुनकर मेरी सांसे अब ज़ोर ज़ोर से चलने लगी थी और में उसकी वो बातें सुनकर गरम होने लगी थी. फिर उसने हिम्मत करके बिना देर किए तुरंत ही मेरा चेहरा अपने हाथों में लेकर मेरे होंठो को चूसना शुरू कर दिया, जिसकी वजह अब में पहले से भी ज्यादा गरम होती जा रही थी.

अब उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और वो मेरे बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबाने सहलाने लगा था, जिसकी वजह से मुझे बड़ा ही मस्त मज़ा आ रहा था. फिर उसने मेरे कपड़े खोलकर मुझे नंगा कर दिया और अब में उसके सामने पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी, मेरा गोरा कामुक बदन उसके सामने था और यह देखकर उसका लण्ड भी पेंट के अंदर ही उठकर अपना आकर बदलकर मोटा हो चुका था. अब उसने अपने एक हाथ से मेरी बूर को सहलाना शुरू कर दिया, उसके यह सब करने की वजह से में उस मज़े को लेकर मदहोश होने लगी थी और फिर वो कुछ देर बाद मेरी बूर में उंगली करने लगा था और गरम गरम चुम्मे भी करने लगा था.

loading...

अब वो मेरे बूब्स और निप्पल को चाटने और काटने भी लगा था और मुझे उठाकर पेंट के ऊपर से ही वो अपना लण्ड मेरी कामुक जोश से भरी बूर पर रगड़ने लगा था. अब मैने उसको और भी कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया और फिर उसने मुझे घुमाया और नीचे झुका दिया. अब वो पीछे से मेरी बूर और गांड को अपने एक हाथ से खोलकर अपनी जीभ से चाटने लगा था. दोस्तों उसके मेरी बूर पर अपनी गरम जीभ को छूते ही में एकदम से मचल उठी, क्योंकि यह सब मेरे साथ आज पहली बार हो रहा था और मैने सिर्फ सेक्सी फिल्मो में ही यह सब होते हुए द्रश्य बहुत देखे थे, लेकिन यह इतना मस्त मज़ा जोश देता हैं, मुझे उस दिन पहली बार पता चला था.

अब पूरी तरह से जोश में आकर में भी उसका साथ देने लगी. में अपने कूल्हों को आगे पीछे करके हिलाने लगी थी और मेरे मुहं से लगातार सिसकियों की आवाज निकल रही थी. दोस्तों बहुत देर तक यह सब करने के बाद मैने अब उसके पूरे कपड़े उतार दिए और फिर में तो पहली बार उसका मोटा और लंबा लण्ड देखकर एकदम से डर गयी, क्योंकि वो तो मेरी उम्मीद से भी ज्यादा बड़े आकार का था, उसका वो लण्ड सात इंच लंबा और दो इंच मोटा भी था.

दोस्तों उसका वो फूला हुआ गुलाबी रंग का टोपा मेरे मन में सवाल उठा रहा था कि में इसको कैसे अपनी छोटी कुंवारी बूर के अंदर ले सकती हूँ और अगर यह ज़ोर जबरदस्ती अंदर चला गया तो आज मेरी बूर की खेर नहीं हैं, में दर्द की वजह से कहीं में मर ना जाऊं? फिर भी मैने हिम्मत करके उसका लण्ड अपने मुहं में भरकर चूसना शुरू कर दिया, ऊह्ह्ह्ह ऊऊहह इतना मोटा और लंबा लण्ड मैने पहली बार अपने मुहं में लिया था.

फिर में उसको जितना चूस रही थी वो उतना ही मोटा हो रहा था और वो भी जोश मस्ती में अपनी गांड को हिला हिलाकर मेरे गले में अपने लण्ड को जबरदस्ती उतार रहा था और मेरे मुहं में धक्के मार रहा था. फिर बहुत देर तक लण्ड को चूसने के बाद उसने मुझे खड़ा करके दीवार के सहारे उल्टा खड़ा कर दिया और वो अब अपना मोटा लंबा लण्ड मेरी गांड से छूकर सहलाने लगा था, जिसकी वजह से में सिहर उठी थी. अब वो मेरी गांड को पकड़कर दबा भी रहा था और पीछे से अपना लण्ड मेरी बूर से छू भी रहा था और यह सब करते हुए मेरे दोनों बूब्स को ज़ोर से भींच भी रहा था. अब में अपनी गर्दन को पीछे करके उसके होठों को चूम रही थी. उसके साथ मुझे यह सब करते हुए मज़े के साथ साथ जोश भी बहुत आ रहा था और उस समय हम दोनों बहुत गरम हो चुके थे.

फिर वो कुछ देर बाद मुझे अपनी गोद में उठाकर अपने कमरे में ले गया और उसने अंदर जाते ही मुझे पलंग पर लेटा दिया और उसके बाद उसने तुरंत ही मेरे दोनों पैरों को पूरा खोलकर बीच में आकर, अब वो मेरी खुली हुई रसभरी बूर को अपनी जीभ से चाटने के साथ साथ मेरी बूर के दाने को अपनी जीभ से सहलाते हुए टटोलने लगा था.

दोस्तों में उस समय उस मज़े मस्ती की वजह से अपने आपको जन्नत में महसूस कर रही थी और मेरे मुहं से सिसकियों की आवाज निकलने लगी थी. फिर मेरी ऊफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्ह की आवाज़ को सुनकर वो जोश में आकर पहले से ही तेज़ तेज़ मेरी बूर को चूसने लगा था और जोश की वजह से मेरी बूर अब पहले से भी ज्यादा गीली चिपचिपी हो चुकी थी और वो लगातार मेरी बूर का पानी चूसे जा रहा था और कभी कभी बीच में बूर के अंदर अपनी उंगली को डालकर अपनी ऊँगली को चाट भी रहा था. अब में भी उसका पूरा पूरा साथ देते हुए अपनी गांड को ऊपर नीचे उठाकर हिलाकर मज़े ले रही थी. फिर उसने मुझसे कहा कि अब तुम पूरी तरह से गरम हो चुकी हो, इसलिए अब में तुम्हारी बूर में अपना लण्ड डालकर तुम्हे अब तुम्हारी ऐसे चुदाई करूंगा कि तुम हमेशा इसको याद रखोगी.

अब सबसे पहले वो मेरे ऊपर आकर मेरे दोनों बूब्स को कुछ देर बारी बारी से अपने मुहं में भरकर चूसने लगा और उसके बाद वो मेरे होंठो को चूमता हुआ मेरे पूरे बदन को अपने होंठो से चूमने सहलाने लगा. फिर उसने अपने लण्ड को मेरी बूर के खुले हुए होंठो के ऊपर रखकर बूर के दाने को कुछ देर सहलाया और थोड़ी देर तक सहलाने के बाद उसने अचानक से एक ज़ोर का धक्का मारकर अपना पूरा लण्ड मेरी नाज़ुक छोटी सी बूर की गहराईयों में उतार दिया.

दोस्तों में तो अचानक हुए उस प्रहार की वजह से दर्द के मारे तड़प उठी थी, उस एक धक्के ने मेरी सांसो को बिल्कुल अटका दिया था.

मेरे पूरे चेहरे पर पसीने की बूंदे नजर आने लगी थी, क्योंकि उसका पूरा लण्ड मेरी बूर के अंदर जाकर सीधा मेरी बच्चेदानी को छूकर मेरे शरीर में दर्द देने लगा था और ऐसा मेरे साथ उस दिन पहली बार हुआ था. फिर वो कुछ देर रुकने और मेरे शांत हो जाने के बाद अब अपने लण्ड को मेरी कसी हुई बूर के अंदर बाहर करने लगा और समय के साथ साथ धीरे धीरे मुझे भी अब उसका लण्ड अपनी बूर के बाहर अंदर होना अच्छा लगने लगा था.

अब में हल्की आवाज से चिल्लाने लगी और उसको अपनी जमकर चुदाई करने के लिए आमंत्रित भी करने लगी थी, ऊऊह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह हाँ ऐसे ही मेरी जान हाँ ऊफ्फ्फ पूरा अंदर तक डालो हाँ तुम ऐसे ही मेरी बूर की चुदाई करो आईईई ओह्ह्ह, हाँ तुम ऐसे ही मुझे चोदो हाँ और तेज़ और तेज आहह और में पीछे से उसकी गांड को पकड़े हुए थे. अब वो मेरी बातें सुनकर पूरी तरह जोश में आकर पहले से भी ज्यादा तेज धक्के लगाने लगा था और फिर कुछ देर बाद उसने मुझे अपने सामने घोड़ी बनाकर दोबारा मेरी बूर में अपने लण्ड को डालकर उसी जोश के साथ चोदना शुरू कर दिया और वो बिल्कुल पागल ही हो चुका था.

दोस्तों अब वो धक्के देते हुए मुझसे कहे जा रहा था कि ऐसा मस्त जिस्म और ऐसी मजेदार बूर आज से पहले मैने कभी नहीं देखी और ना मुझे तुम्हारी जैसी जोश से भरी बूर की चुदाई करने का मौका मिला हैं. अब वो मुझे तेज तेज लगातार धक्के देकर कुतिया की तरह चोद रहा था और बीच में कभी कभी वो अपना लण्ड मेरी बूर से बाहर निकालकर नीचे झुककर मेरी बूर को चाट भी रहा था और साथ ही मेरी गांड में अपनी उंगली ही डाल रहा था.

दोस्तों मुझे क्या पता था कि अब उसके मन में क्या चल रहा हैं और उसका इसके आगे क्या करने का इरादा क्या हैं? फिर वो मुझे वैसे ही छोड़कर पास ही रखी वेसलिन को लेकर वापस आ गया और उसने मेरी गांड के छेद पर बहुत सारा वेसलिन लगाकर मेरी बूर को एकदम चिकना कर दिया.

अब अपने लण्ड को एक हाथ में पकड़कर वो मेरी गांड के छेद में धीरे धीरे दबाते हुए अंदर करने लगा था और में अपने एक हाथ से अपनी बूर को सहलाने लगी जिसकी वजह से मुझे ज्यादा दर्द ना हो. फिर उसने जोश में आकर एक ज़ोर का धक्के के साथ अपना पूरा का पूरा लण्ड मेरी गांड में भी उतार दिया और फिर मुझे पूरा नीचे झुकाकर मेरी गांड के ऊपर आकर उसने मेरी गांड में अपने लण्ड को तेज तेज धक्के देकर मेरी गांड मारना शुरू किया.

फिर उसने कुछ देर बाद चुदाई का आसन बदलकर अब मुझे अपने ऊपर बैठकर मेरी गांड मारी और उसी समय मेरी बूर में अपनी दो उंगलियाँ डालकर हिलाने भी लगा था. दोस्तों मुझे उसके साथ वो सब करने में बहुत मस्त मज़ा आ रहा था और उस दिन उसने मुझे हर तरह से चुदाई के बड़े मस्त मज़े दिए. फिर करीब तीन घंटे तक रुक रुककर उसने मेरी बूर को मार मारकर बिल्कुल सुजा दिया था, लेकिन वो था कि हर बार झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था.

दोस्तों पहली बार वो करीब बीस मिनट के बाद झड़ा था और में उस चुदाई में चार बार झड़ चुकी थी और अब में बहुत थक भी चुकी थी, लेकिन मुझे पहली बार उसका वो गरम वीर्य अपने अंदर महसूस करके बड़ा ही जोश अच्छा महसूस कर रही थी, क्योंकि दोस्तों पहली बार मेरी बूर को पूरी तरह से संतुष्ट करके किसी असली मर्द ने चोदा था. फिर बहुत देर तक मुझे बिना झड़े लगातार चोदने के बाद उसने अपना लण्ड मुझे चूसने के लिए कहा और जैसे ही मैने उसके लण्ड को अपने मुहं में भरकर चूसना शुरू किया, वो मेरे मुहं में ही झड़ गया. दोस्तों उसके बाद बहुत देर तक हम दोनों उसी तरह से नंगे ही पलंग पर एक दूसरे को प्यार करते रहे और फिर में उसके बाद अपने घर वापस आ गयी. दोस्तों उसके बाद भी बहुत बार हम दोनों ने एक दूसरे के जिस्म की आग को मस्त चुदाई के मज़े लेकर बुझाया और वो मेरा अब तक का सबसे अच्छा सेक्स अनुभव रहा. फिर में कुछ दिनों के बाद वापस दिल्ली अपने घर आ गयी, लेकिन वो उसके साथ पहली चुदाई की रात मुझे आज भी अच्छी तरह से याद हैं जिसके बारे में सोचते ही मेरा रुआ रुआ खड़ा हो जाता हैं.

दोस्तों उसके बाद भी चुदाई के मज़े तो मैने बहुत से लोगो से लिए हैं, लेकिन उसके जैसे मज़े मुझे आज तक किसी ने नहीं दिए और आज भी उस रात के बारे में सोचते ही मेरी बूर और गांड दोनों ही गीले हो जाती हैं. दोस्तों यह था मेरा सबसे अच्छा सेक्स अनुभव था, पता नहीं आपको यह अच्छा लगे या नहीं, लेकिन मुझे तो बड़ा मज़ा आया. अब मुझे भी आप लोग जाने की आज्ञा दे.

loading...

आप के लिए चुनिन्दा कहानियां