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परधानवा के रहर में चूत चुदाई

परधानवा के रहर में चूत चुदाई

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हेल्लो दोस्तो मेरा नाम अमित हैं। दोस्तों मेरी उम्र 22 साल की हैं मेरी लम्बाई 5.8 हैं रंग गौरा और में बहुत हेंडसम हूँ। अभी कुछ समय पहले मेरी बाहर नई नई नौकरी लगी थी। में वहाँ से कुछ दिनों की छुट्टी ले कर घर पर आया था।
ये कहानी अभी पिछले महीने की हैं जिसमे मैने अपनी छोटी बहन सुमन की चुदाई खेत पर की और फिर उसके बाद क्या क्या हुआ वो आप सभी कहानी मे ही पड़ लेना।

दोस्तो पहले में आपका परिचय अपनी बहन से करा देता हूँ। दोस्तों मेरी छोटी बहन का नाम सुमन हैं। उसकी उम्र 19 साल तक होगी उसके फिगर बहुत बड़े 32/ 28 /34 हैं। और वो बहुत सुंदर हैं वैसे तो वो शहर मे रहकर पड़ाई कर रही हैं।
लेकीन अभी उसकी कॉलेज की छुट्टियाँ चल रही हैं। और सुमन जब से शहर से आई हैं। वो काफ़ी समझदार हो गई हैं। एक तो वो वैसे ही बहुत सुंदर हैं उपर से उसके छोटे छोटे कपड़े मे वो तो और सेक्सी लगती हैं। और उसका फिगर देख कर तो कीसी का भी लण्ड खड़ा हो जाए। क्या फिगर हैं मोटे और गोरे बूब्स पतली कमर भरी हुई गांड दोस्तो आप तो जानते हैं की बाहर नौकरी जब कुछ भी नही कर सकते और वहाँ उन्हे कुछ भी देखने को नही मिलता। अब घर पर आकर तो बस मुझसे रहा नही जा रहा था। में हर समय बस यही सोच रहता था की बस कीसी की भी बूर मिल जाए चाहे वो बूर सुमन की ही क्यों ना हो बस मुझे तो बूर की चुदाई करनी थी।
तभी एक दिन की बात हैं। में बैठ कर सुमन के बूब्स को निहार रहा था। की तभी माँ ने कहा की बेटा जा कर अपने बाबूजी को खेत पर खाना दे कर आओ। तो मैने कहा ठीक हैं माँ आप खाने को पैक कर दो तो मै बाबूजी को दे कर आता हूँ। तभी सुमन ने कहा की माँ मै भी भैया के साथ खेत देखने जाउंगी मुझे बहुत दिन हो गये खेत पर गये हुए तो माँ ने कहा की ठीक हैं। और माँ ने खाना पैक कर के मुझे दे दिया और हम दोनों जाने लगे।
मैने एक सायकील ले ली और सुमन को आगे बैठने के लिए कहा तो सुमन आगे बैठ गई। और हम चल दिए और फिर खेत पर पहुंच कर बाबूजी को खाना खिलाया। और फिर हम खेत पर टहलने लग गये। बाबू जी खाना खा के एक मजदूर को घर उसे बुलाने चले गये। और हम दोनों को कहा की में जा रहा हूँ। और हो सकता हैं की मुझे थोड़ी देर हो जाएगी तुम लोग टहल कर घर चले जाना। फिर क्या था मै और सुमन टहलने लगे वहाँ पर हमारा एक रहर का खेत था। में उसमे से एक गन्ना तोड़ कर उसे चूसने लगा था।
तभी सुमन ने मुझसे कहा की भैया मुझे भी गन्ना चाहिए। तो मैने उसे भी तोड़ कर गन्ना दे दिया। और वो मजे से उसे चूसने लगी कुछ देर के बाद सुमन ने मुझसे कहा की भैया मुझे टयलेट लगी हैं। तो मैने कहा की यहीं पर कहीं भी जगह देख कर कर लो। यहाँ पर कोई दरवाजा तो नही हैं। और मै आगे की तरफ चला गया फिर मैने एक रहर के झुंड के पीछे छुप गया और चुप कर सुमन को देखने लगा। सुमन ने अपनी जीस उतारी। और मैने देखा की उसने अंदर एक पिंक कलर की पेंटी पहनी हुई थी उसे भी उतार दी। तब मैने पहली बार सुमन की गोरी गांड देखी जिसे देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया।
और फिर सुमन जब खड़ी हो रही थी। अब मैने उसकी गांद का गुलाबी छेद भी देखा जिसे देख कर मुझसे रहा नही जा रहा था। फिर सुमन ने अपनी जींस पहन कर मुझे आवाज़ लगाई। तो मै उसके पास गया और मेरे पास आते ही उसकी नज़र मेरे लोवर पर पड़ी। जो की एक टेंट बना हुआ था। अब वो ज़रूर समझ गई थी की मै उसे टायलेट करते हुऐ देख रहा था। फिर वो मुस्कुराने लगी और उसने मुझसे कहा की भैया मुझे कोई अच्छा सा गन्ना तोड़ कर दो ना।
में पहले तो ये समझ नही पा रहा था। पर मैने कहा की तू यहीं रुक मै तेरे लिए एक अच्छा से रहर का इंतज़ाम करता हूँ। तो सुमन ने कहा की सच भैया जल्दी करो मुझसे रहा नहीं जा रहा। मुझे सुमन की बातों मे मुझे कुछ शरारत नज़र आ रही थी। मै खेत के अंदर चला गया और वहाँ मुझे एक जगह खाली और साफ सी नज़र आई। और अब तो मेरे सामने सिर्फ सुमन की गोरी गांड ही घूम रही थी। फिर क्या था मैने अपना 8 इंच का लण्ड बाहर निकल कर मूठ मारने लगा उधर सुमन काफ़ी देर तक मेरा बाहर इंतजार करने के बाद जाने कब अंदर आ गयी। और मेरी आँखे बंद थी अचानक मुझे कीसी और का हाथ अपने लण्ड पर महसूस हुआ। तभी मैने आँख खोली तो देखा की सुमन घुटनो के बल बैठ कर मेरे लण्ड को सहला रही हैं। मैने उसको कहा की सुमन ये क्या कर रही हो। तो सुमन ने कहा की भैया ये आपकी हालत मेरी वजह से हुई हैं ना तो मैने सोच की इससे ठीक भी मै ही कर दूँ। फिर क्या था मेरे चेहरे पर मुस्कान थी। और मैने सुमन को कुछ नही कहा जिसे उसने मेरी हाँ समझी और उसने मेरा लण्ड मुहं मे लेकर उसे चूसने लगी मै उसके सर पर हाथ फिरा रहा था और मेरे मुहं से अहाआ आआआहा की आवाज़ निकल रही थी। सुमन मेरा लण्ड को एक रहर की तरह चूस रही थी। जैसे की उसने पहले भी कई बार लण्ड चूसा हो।
काफ़ी देर बाद मैने सुमन को खड़ा कीया और उसकी टी-शर्ट के उपर से ही उसके मोटे बूब्स दबाए। और मैने उसे कहा की रूको मै अभी आता हूँ तो उसने कहा की कहाँ जा रहे हो तुम। तो मैने कहा की बस दो मिनट मे आया और मै भाग के गया और जिस चादर पर बाऊजी ने खाना खाया था। वो चादर उठा कर लाया और फिर उसे वहाँ पर बिछा दिया। और मैने सुमन के सभी कपड़े उतार दिये और सुमन को पूरा नंगा कर दिया। और अपने भी सारे कपड़े उतार लिये। सुमन के बड़े बड़े बूब्स पपीते की तरह हवा मे झूल रहे थे। मैने सुमन को लिटा कर उसके बूब्स को मुहं मे लेकर चूसने लगा। और मैने एक उंगली सुमन की बूर मे डालकर अंदर बाहर करने लगा। काफ़ी देर अंदर बाहर करने से सुमन की बूर बहुत गीली हो गई थी। और सुमन ने मुझसे कहा की भैया अब रहा नही जा रहा तो मैने भी अपने लण्ड पर थूक लगाकर सुमन की बूर लण्ड लगाया और जोर से एक धक्का लगाया और मेरा आधे से ज्यादा लण्ड सरक कर उसकी बूर मे समा गया। और फिर दो चार धक्के मारने के बाद मे पूरा लण्ड सुमन की बूर मे समा गया और मै सुमन को चोदने लगा। उसे चोदते वक़्त मेरे मन मे एक ही ख़याल आ रहा था। की जिस तरह सुमन की बूर मे मेरा लण्ड गया हैं। इस चुदाई से तो ये साफ हो जाता हैं की सुमन पहले भी कई बार चुद चुकी हैं। लेकीन मुझे इससे कोई फर्क नही पड़ता की मेरी बहन कीससे चुद्वाती हैं। क्योकी वो तो इतनी सेक्सी माल हैं की उसे चोदने के लिए कोई भी तैयार हो जाए और इसी उधेड़ वन मे सुमन को करीब 20 मिनट से में ज़ोर ज़ोर से चोद रहा था। और सुमन भी खूब आवाज़ निकाल रही थी आआआहाल्ह भैया और छोड़ो मुझे में झड़ने वाली हूँ। तब मैने और तेज़ धक्के मारने शुरू कर दिये। और सुमन झड़ गई इधर में भी झड़ने वाला था। थोड़ी देर बाद मै भी झड़ गया। जैसे ही में ने अपना लण्ड सुमन की बूर मे से बाहर निकल कर हम खड़े हुए तो हम दोनो के होश उड़ गये सामने बाबूजी खड़े थे। उन्हे देख कर हम दोनो की ज़ुबान पर जैसे ताला लग गया था।
और फिर बाबूजी आगे आए और मुझे समझ नही आ रहा था। की में उनसे क्या कहूँ तभी बाबूजी आगे आए और उन्होने सुमन की गांड पर हाथ फेरा और कहा की अरे सुमन तू तो शहर जा कर और भी कड़क माल बन गई हो। इसे सुन कर तो हमारी जान मे जान आई। और फिर क्या था। सुमन ने झट से घुटनो के बल बैठ कर बाबूजी के लण्ड को बाहर निकल लिया। बाबूजी का लण्ड 9 इंच लंबा और दो इंच मोटा हैं। फिर सुमन ने बाबूजी का लण्ड को सहलाते हुए कहा की इतने मोटे ताज़े लण्ड हमारे घर मे ही हैं।
और में ऐसे ही बाहर के मर्दो से चुद्वाती रही। और फिर सुमन ने बाबूजी का लण्ड मुहं मे ले लिया और चूसने लगी उसे देखा मेरा लण्ड भी फिर से खड़ा हो गया। और मै भी सुमन के सामने जा कर खड़ा हो गया। तभी सुमन ने मेरा भी लण्ड हाथ मे ले लिया। और उसे भी चूसने लगी काफ़ी देर के बाद बाबूजी लेट गये। और सुमन बाबूजी के लण्ड पर अपनी बूर को लगाकर बैठ गई फिर और बाबूजी धक्के मारने लगे। पहले तो थोड़ी देर तक सुमन ने मेरा लण्ड चूसा फिर मैने अपने हाथ मे लेकर अपना लण्ड सहलाने लगा। और जब मुझे पीछे की वार मिल गया तो सुमन की गोरी गांड देखकर मेरे मुहं मे पानी आ गया था।
मैने अपने लण्ड पर तोड़ा सा थूक लगाया। और पीछे से सुमन की गांद के गुलाबी छेद पर लगाया। तो सुमन ने पीछे देखकर मुझे एक स्माइल दी तो जैसे उसने हाँ भर दी फिर क्या था। मैने एक ज़ोर दार धक्का मारा और मेरा लण्ड सुमन की गांड मे फिसलता हुआ चला गया। फिर हम दोनो ने धक्के मारने शुरू कर दिये और सुमन आवाज़े निकल रही थी। आआहाआआहहाहा बाबूजी और तेज़ और तेज़ और बाबूजी भी और तेज़ मारने लग गये करीब 25 मिनट के बाद हम लोग बारी बारी से झड़ गये और फिर सुमन ने मेरा और बाबूजी का लण्ड चूस कर साफ कीया। और फिर हमने अपने कपड़े पहन कर बाहर आ गये। फिर हम दोनो घर आ गये उस दिन रात को भी माँ के सोने के बाद हम तीनो ने छत पर चुदाई की जब तक हमारी छुट्टियां थी हमने चुदाई के खूब मज़े लिए। और फिर सुमन अपने कालेज चली गई। और में अपनी जॉब पर चला गया। अब भी में रोज़ शाम को सुमन से फ़ोन पर बात करता हूँ। अभी कुछ दिनो के बाद में दीवाली की छुट्टीयां ले कर घर जाऊंगा और सुमन भी आएगी तो हम फिर से चुदाई करेंगे।

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