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बीबी और बेटी दोनो का चूत भेदन किया

Antarvasna sex story :- बीबी और बेटी दोनो का चूत भेदन किया

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सत्यम मेरा जिगरी दोस्त था. उसकी बीवी सिमा को मै भाभीजी कहता था, उसकी 17 साल की एक बहुत की मस्त जवान लड़की थी नेहा. सत्यम मेरे घर के बगल ही रहता था. वो बस ड्राईवर था और मै कनडकटर था. हम दोनों बचपन के दोस्त थे. हमारी दोस्ती की लोग मिसाल देते थे की राजीव और सत्यम की जोड़ी तो जैसे शोले की जय और वीरू की जोड़ी है. मेरी अभी शादी नही हुई थी जबकि सत्यम की शादी आज से 19 साल पहले को गयी थी और उसकी लड़की नेहा 17 साल की हो गयी थी. खैर सब कुछ अच्छा चल रहा था की एक दिन बड़ा बुरा हो गया. 1 हफ्ते की छुट्टी लाकर मै गांव चला गया और इधर सत्यम की बस का एक बड़ा भीषण एक्सीडेंट लखनऊ के पास हो गया. इस हादसे में मेरी जिगरी दोस्त सत्यम की जान चली गयी और उसकी बीवी सिमा विधवा हो गयी और उसकी बेटी नेहा इस हादसे में अनाथ हो गयी.
जब मै सत्यम के घर गया तो सिमा मेरे सीने से लिपट गयी और जोर जोर से दहाड़ मार के रोने लगी राजीव भाईसाहब !! अब मेरा क्या होगा?? अब मै कहाँ जाउंगी?? सिमा भाभी दहाड़ मार के रोने लगी तो मै भी भावुक हो गया. मै भी चीख चीख कर रोने लगा. हे उपरवाले !! ये तुने क्या किया?? सिमा भाभी को बेवा कर दिया और नेहा बेटी को अनाथ कर दिया. मै भी बहुत रोया. खैर किसी तरह जिंदगी चलने लगी. क्यूंकि दोस्तों, एक से एक बड़ी से बड़ी हस्तियाँ मौत के मुंह में चली गयी पर ये दुनिया ना कभी रुकी है और ना कभी रुकेगी. मै बस पर काम करने लगा. अब उत्तर प्रदेश बस परिवहन विभाग ने एक नया बस ड्राईवर भेज दिया था जो मेरी बस को चलाता था. मेरा काम तो वही बस कनडकटरी का था. अब वो हसी मजाक वाली बात ना थी. सत्यम और मै सारा दिन हसी मजाक करते रहते थे, तो दिन यूँ कट जाता था. खैर मै अपनी जिंदगी जीने लगा. हर शाम जब ड्यूटी खतम होती तो सिमा भाभी के घर जाता और हाल चाल लेता. वो जो भी काम देती मै कर देता. कभी उनकी सब्जी ले आता. कभी उसका गेहूं पिसा देता, नेहा बेटी की फ़ीस जमा कर देता.
जैसे जैसे दिन बीतने लगे वैसे वैसे मन हुआ की अगर मै सिमा भाभी को पटा लूँ तो चुत का परमानेंट इंतजाम हो जाए. एक दिन मै जब सत्यम की बेवा सिमा भाभी से मिलने गया तो वो रोने लगी. ६ महीनो से उन्होंने कमरे का किराया नही भरा था. मेरे कंधे पर सिर रखकर रोने लगी.
सिमा भाभी !! तुम बिलकुल परेशान मत हो. मै कुछ इंतजाम करता हूँ. मैने कहा.
अगले दिन मै बैंक से 30000 रुपये निकाल निए. सिमा का 6 महीने का किराया भर दिया. और 6 महीने का अडवांस में भर दिया. सिमा भाभी मेरे अहसान तले अब दब गयी. जब उनके घर जाता तो कभी भी बिना चाय पिलाये मुझको ना आने देती थी. दोस्तों, अब तो हर रात सिमा मुझे सपने में दिखने लगी. मै उसकी चुदाई कर रहा हूँ, सिमा मुझे पुरे तन मन धन से प्यार कर रही है, मै यही हर रात सपने में देखने लगा. कुछ दिन बाद मै उसके घर गया तो वो कहने लगी की स्कूल वालों ने उसकी बेटी नेहा का नाम काट दिया है क्यूंकि ३ महीने से उसकी फ़ीस जमा नही हो पायी है. इस पर मैने भी दांव खेल दिया.
सिमा ! मुझसे तुम शादी कर लो. अब मै तुमको और कष्ट उठाते हुए नहीं देख सकता. मै तुमको पति का प्यार दूँगा और नेहा को बाप का प्यार दूँगा. मै आज जान बुझ पर उसको सिमा भाभी नही पुकारा और केवल सिमा बुलाया. सिमा इस पर भौचक्की रह गयी. पर धीरे धीरे बात बन गयी. उसकी माँ जब घर आई तो सिमा ने उनको बताया की मै उससे शादी करना चाहता हूँ तो उसकी माँ भी मान गयी. जबकि मै एक तीर से २ शिकार करना चाहता था. सिमा और उसकी बेटी नेहा दोनों को चोदना पेलना चाहता था. यही मेरा एक मात्र मकसद था. हम दोनों से मंदिर में जाकर शादी कर ली. नेहा भी मान गयी. बिना किसी धूम धड़ाके के मै उससे मंदिर में शादी कर ली.
सुहागरात वाले दिन सिमा कुछ अपसेट थी.
राजीव!! मुझे तुम्हारे साथ सोने में कुछ वक्त लगेगा. मै तुमको हमेशा अपना छोटा देवर ही समझा है !! वो बोली.
कोई बात नही सिमा. मै तुमसे शादी अपने सुख के लिए नही की है. बल्कि तुम्हारी सेवा के लिए की है. मैने तुमसे शादी सत्यम की आत्मा को सुख पहुचानें के लिए की है मैने कहा और एक बार फिर से मगरमच्छ जैसे आँशू बहाने लगा. 5 दिन तक सिमा ने मुझको चुत नही दी. वो राजिव की याद में रोटी बिलखती रही. पर फिर सब कुछ सही हो गयी.
मै तैयार हूँ अब राजीव. मै आपको तन और मन से भी आपको अपना पति स्वीकार कर लिया है सिमा बोली. दोस्तों, मै तो अपनी सिमा की चुत मारने के लिए कबसे बेक़रार था. कबसे मैने ये सपना संजो के रखा था. सिमा बिलकुल मक्कन की टिकिया जैसी थी. शादी के 5 दिन मैने उसके साथ अपनी सुहागरात मनाई. जिन लाली लगे होंठ को देख के मै मुठ मार लेता था, आज वो होंठ मेरे थे. सबसे पहले तो मैने सिमा के होंठो को खूब पिया. वो बचती रही मै उसके दोनों चिकने गालों को हाथ में लेकर उसके होंठ पीता रहा.
नही जी होंठ पर नही ! वो बोली.
सिमा! अब तुम मेरी पहले वाली भाभी नहीं हो. अब तुम मेरी बीवी हो. अब मेरा तुमपर पूरा हक है, मुझे मत रोको मैने कहा और अपनी बातों में उसे फस लिया. खूब जी भरके मैने उसके रसीले होंठों का रसपान किया. फिर मै उसका ब्लौज़ उतार दिया. उसके मम्मे खूब बड़े बड़े ३६ साइज़ के थे. जिन मम्मो को देख देख के मै हाथ से मुठ मारा करता था , अब वो मेरी मिलकियत हो चुके थे. सिमा ना नुकुर करती थी. मैने दोनों मम्मे पीता रहा. उसके बाद मैने उसको पूरा नंगा कर दिया. उसकी पैंटी उतार दी. सिमा के दोनों पैर मैने खोल दिए जैसे सुबह सुबह अखबार पढ़ने वाले अखबार खोल देते है. आज भी उसकी फिगर मेंटेन थी. मेरा काला कलूटा लण्ड तो कबसे सिमा को चोदने को बेक़रार हो रहा था. मै सिमा की चिढिया देखी. बड़ी छोटी सी मासूम सी चिड़िया[चुत] थी उसकी. आज भी सिमा के दोनों मम्मे अच्छे खासे कसे कसे थे. मै उसकी मम्मो को खूब दबाया. उसकी निप्लस को हाथ की उँगलियों से खूब मसला मैने. वो बिस्तर पर खूब तडपी दोस्तों. जिस सिमा भाभी को देख देख के मैने ना जाने कितनी बार मुठ मारा था आज मैने उसको पाने पास बिलकुल नंगा कर लिया था.
मेरे बाहू पाश में वो बिना कपड़ों के थी, लग रहा था की जिंदगी की सारी बेशकीमती दौलत मेरे हाथ लग गयी हो. सिमा की एक एक पसलियां, उनके कमर की हत्थियाँ, उसकी कॉलर बोने सब मुझको दिख रही थी. मैने उसको सीने से लगा लिया और खूब प्यार किया. घंटों हम दोनों नए नए मिया बीवी बने २ प्राणी एक दूसरे से लिप्टा लिपटी करते रहे. आखिरकार अब मै उसको चोदने की तयारी कर रहा था. मैने जब उसकी चिकनी टाँगे खोल दी और उसकी चिड़िया[ चुत] का दीदार किया तो वो लजा गयी. अपने चेहरे को उसने अपने हाथ से ढक लिया.
कोई बात नहीं सिमा!! मैने कहा. उसकी चिड़िया[ चुत] पर मैने ज्यूँ ही अपनी उँगली फिराई जो उसकी चुत में कंपन होने लगा. मैने और २ ४ बार सिमा की चुत पर उपर से नीचे ऊँगली फिराई, वो तडप गयी. फिर मैने अपना मुह उसकी चिड़िया पर लगा दिया और उसकी बुर पीने लगा. सिमा ने एक बार भी मेरी ओर नही देखा. बल्कि अपने हाथों से अपने मुंह को ढके रही. सिमा सत्यम को बहुत प्यार करती थी. मेरे बेडरूम में भी सत्यम की फोटो उसने लगा ली थी. सत्यम के फोटो के सामने ही मै उसको चोदने जा रहा था. सत्यम की आत्मा अगर मुझे देख रही होगी तो मन ही गाली दे रही होगी की दोस्त मैने तुझे क्या समझा था, तू क्या निकला.
मैने अपना उफनता लण्ड आखिर सिमा के भोसड़े पर रख दिया और अंडर ढेल दिया. लण्ड अंदर प्रविष्ट हो गया. मै सिमा को पेलने लगा. मै चाहता था की वो मेरी ओर देखे. उसकी आँखों में देखते हुए उसको मै जमकर चोदूं, पर ऐसा ना हो सका दोस्तों. मैने कहा कोई नही चुत तो उसने दी. यही क्या कम है. मै फट फट का शोर करके उसको चोदने लगा. मेरी कमर उसके पुट्ठों से जल्दी जल्दी लड़ रही थी और फट फट का शोर कर रही थी. मै सिमा को जोर जोर से पेल रहा था. उसने अपने बालों को खोल रखा था, वो क़यामत लग रही थी. फिर मैने रफ़्तार बढा दी और जल्दी जल्दी उसको चोदने लगा. मेरा मोटा काला कलूटा लण्ड उसकी गोरी छूट को मार रहा था. मै उसके बूब्स सहलाते दबाते, मींजते मसलते हुए उसको चोद रहा था. कुछ मिनट बाद मैने उसकी चुत में ही अपना माल छोड़ दिया.
अपनी नई नई बीवी बनी सिमा भाभी को अब दूसरी तरह से पेलने का समय आ गया था. मै नीचे लेट गया और सिमा को अपने लण्ड पर बैठा लिया. जैसे ही वो मेरे खड़े शख्त लण्ड पर बैठी २ सेकंड के लिए उसे दर्द हुआ, उसे लगा की कोई मोटा खुट्टा उसके भोसड़े में घुस गया हो. उसकी नाभि का छेद देख के मै मचल गया. बड़ी सुंदर नाभि थी उसकी.
सिमा !! अब मुझको चोदो !! मैने कहा.
धीरे धीरे सिमा मेरे लण्ड पर उट्ठक बैठक लगाने लगी. उसके खुले काले घने बाल चारों ओर बिखर गए थे. मुझे वो दुनिया की सबसे कमनीय, चुदासी, और कमाल की औरत लग रही थी. मैने तो उसके रूप और सुंदरता पर मर मिटा था. गोरे गोरे उसके चिकने गाल, गलों पर डिम्पल, उसके रसीले होंठ, उसका ये नंगा महकता बदन, उसके चिकने नंगे गोल कंधे मन कर रहा था बस लण्ड पर बैठाए दिन रात उसको चोदता ही रही. काम पर भी ना जाऊ. बस यही मेरा दिल कर रहा था दोस्तों. धीरे धीरे सिमा मेरे लण्ड पर हिचकोले खाने लगी. मुझे चोदने लगी. इधर मै भी नीचे से अपना बल लगता जिससे मेरा लण्ड गप्प गप्प उसकी बुर को भांज और मांज रहा था. यादकर थी वो मेरी सुहागरात सिमा के साथ. जहाँ वो अपनी कमर और पिछवाडा उठाकर खुद को चुदवा रही थी, वही मै भी अपनी ताकत लगा रहा था और खप्प खप्प उसको पेल रहा था. लग रहा था वो किसी घोड़े पर बैठी और घुड़सवारी कर रही है. मेरे लण्ड का घोड़ा उसकी चुत में बड़ी जल्दी जल्दी दौड़ लगा रहा था.
कुछ देर बाद सिमा की कमर नाचने लगी और मस्त चुदाई होने लगी. करीब १ घंटे बाद मैने अपने रस की ताज़ी ताज़ी और गर्म गर्म फुहारे उसकी योनी में छोड़ दी. हमारी सुहागरात दोस्तों पूरी और सम्पूर्ण हो गयी. एक दिन सिमा जब बाहर गयी हुई थी तो मैने उसकी बेटी नेहा को पटाया. उसकी बेटी अब मेरी बेटी बन गयी थी. मैने उसके बालों में तेल लगा दिया. उसकी चोटी बाँध दी. मैने उसको स्कूल के लिए तैयार करते हुए उसके मम्मे भी दाब दिए. नेहा नादान थी. कुछ समझ ना पायी. धीरे धीरे मैने नेहा को भी पटा लिया दोस्तों.
नेहा बेटे! तुमको जादू देखना है ?? मैने पूछा
हाँ राजीव अंकल दिखाओ दिखाओ ! वो बोली. जब राजिव जिन्दा था तक नेहा मुझको अंकल अंकल कहकर बुलाती थी. उसकी वही आदत पड़ी थी. वो अभी मुझको पापा नही कहती थी.
नेहा बेटी !! इस जादू में जरा दर्द होगा, पर बाद में मजा खूब आएगा !! मैने कहा.
ठीक है राजीव अंकल!! नेहा बोली.
मेरा दिल जब 17 साल की इस कच्ची कली कर पा आ गया. मै नेहा को अंडर बेडरूम में ले गया. उसके सारे कपड़े उतार दिए. उसके नए नए मम्मो को मैने खूब पिया. कहीं सिमा बाजार से ना लौट आये, मैने सोचा जल्दी से नेहा को चोद लो गुरु. मै झट से उसकी टाँगे फैलाई, उसकी कुंवारी बुर पर लण्ड रखा और लण्ड को अंडर की ओर दबाया. माँ कसम!! दोस्तों, नेहा रोने लगी. मेरे लोहे जैसे लण्ड से उसकी चुत की दीवार को तोड़ दिया. वो रोटी रही. मैने उसको चोदने लगा. एक बार तो लगा की उसकी कुंवारी चुत में मै अपना लण्ड नही चला पाउँगा, पर अंत में कामयाबी मिल गयी. मैने १५ २० मिनट सत्यम की बेटी नेहा को चोद लिया. फिर बाथरूम में जाकर उसको नहला दिया.
नेहा बेटी !! ये बार किसी से कहना नही. ये गंदी बात होती है !! मैने उसको समझाया.
नेहा से किसी से नही कहा. 1 हफ्ते बाद मैने नेहा को बेडरूम में जाकर हर तरह से तरह तरह के पोज में चोदा, उसको खुब मजा आया. क्यूंकि उसकी सिटी तो मैने पहले ही खोल दी थी. दोस्तों , अब मेरे दोनों हाथों में लड्डू था, इधर सिमा को पेलता था , उधर जब सिमा बाहर गयी होती थी, उसकी बेटी नेहा की चुत मै बजाता था. दोनों माँ बेटी को मैने अपना रखेल अब बना लिया था.

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