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भाई का लण्ड ठण्ड में

Hindi Sex Story :- भाई का लण्ड ठण्ड में

जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही कोई भी नादानी हो ही जाती है और कुछ वैसी ही एक नादानी बचपन में अपने चचेरे भाई के साथ मेरी चुदाई होने से हो गई थी..

मित्रो मै तिरधनु, आपका दोस्त, एक बार फिर हाजिर हूँ आपके लौडों को पानी और चुतो को चमचम बनाने के लिए

आज मै आपको मेरी जिंदगी में घटी एक अद्भुत घटना, मेरी बहन के शब्दों में सुना रहा हूँ।

दोस्तों आज मै आपको एक अपनी ज़िंदगी की खूबसूरत पल का एहसास आपके सामने प्रस्तुत कर रही हूँ, इसमें कोई बनावटी बात नहीं है, सिर्फ मैने अपने एहसास को शब्दों के माध्यम से आपके सामने ला रही हूँ।

सभी के ज़िन्दगी में कुछ ऐसे पल आते हैं जहाँ रिश्तों की मर्यादा टूट जाती है, मेरे साथ भी यही हुआ। मैने रिश्तों की मर्यादा को तार तार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, करती भी क्या, कुछ रास्ता भी नहीं था।

जवानी की दहलीज़ पे बड़ी सी बड़ी गलतियां आसानी से हो जाती है। मै राजस्थान के सीकर जिले में रहती थी। मेरी उम्र उस समय 24 साल की थी, मै अपने दादी के साथ रहती थी, क्योंकी मेरे पापा, माँ और भाई बहन सारे जयपुर में रहते थे।

मेरे अंकल का लड़का तिरधनु भी यही सीकर में ही रहता था। अब क्यों की उसकी उम्र मेरे से
काफी छोटी थी, वो रोज मेरे घर आया करता है मेरे घर के बगल में उसका घर था। मै खाना बनाती थी वो मेरे चूल्हे के पास ही बैठा रहता था।

मै मोबाइल में गाना सुनती और वो गाने का विश्लेषण करता, वो मेरे से काफी हिला मिला
रहता था, मै भी उसके साथ अपनी मन की बात को शेयर किया करती थी। मै भरपूर जवानी की दहलीज़ पे थी, मेरी चूचियाँ भी काफी बड़ी बड़ी ब्रा से बांध के रखती, पर कमबख्त जवानी छलक ही जाती थी।

जब मै चूल्हे को फूँक रही होती उस समय मेरी आधी चूचियाँ बाहर आ जाती और तिरधनु मेरी चूचियों को देखकर मज़ा लेता, जब मै मटक के आँगन में चलती तो वो मेरी चुतड़ को निहारते रहता, मुझे भी अच्छा लगता।

मेरी दादी शाम के करीब ७ बजे तक खाना खा के सो जाती थी, मै फ़ोन पे गाने सुनकर करीब ९ बजे तक सोती, एक बार तिरधनु रात को करीब ८ बजे आया और बैठ के अपनी एग्जाम के बारे में बातचीत करने लगा।

दादी घर के बाहर बंगले पे एक कमरा था वही सोती थी, गाँव में बिजली बड़ी मुस्किल से आती थी, सार काम लालटेन से ही होता था, हम दोनों बैठ के बात कर रहे थे, तभी जोर से आंधी चलने लगी, आँगन में पड़े सामान को मै कमरे में रखने लगी, वो भी मेरी मदद कर रहा था।

और कुछ देर में बारिश होने लगी, मै भीग गयी थी, मेरा कपड़ा मेरे बदन पे चिपक गया था। उस दिन मै ढीला ढाला सूट पहन रखा था, ब्रा भी नहीं पहनी थी, भीगने की वजह से मेरे कपडे बदन में चिपक गए था, मेरी दोनों चूचियों साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी, मेरे गांड भी वैसे ही दिखाई दे रहे थे।

जब मै लालटेन की रौशनी में आती मेरा भाई तिरधनु भूखी निगाहों से मुझे देख रहा था, मैने देखा की उसका लण्ड खड़ा हो रहा था उसने ट्रैक सूट पहन रखा था, मेरा भी मन डोल रहा था. पर रिश्तों की मर्यादा का भी ख्याल था, क्यों की वो मेरा चचेरा भाई था।

अचानक से तिरधनु ने मुझे पीछे से पकड़ लिया, उसके दोनों हाथ मेरे चुचों पे थे, वो कह रहा था, माफ़ करना दीदी अब बर्दाश्त के बाहर है, अगर मै अपनी चुदास की भूख नहीं मिटाऊंगा तो मै पागल हो जाऊंगा।
मैने उसके दोनों हाथ को पकड़ के हटाने की कोशिश की पर वो जोर से पकड़ रखा था, मैने कहा तिरधनु ये गलत बात है मै तुम्हारी दीदी हूँ तुम मेरे साथ ऐसे नहीं कर सकते हमारा रिश्ता भाई बहन का है।

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उस पर तिरधनु बोला, मै आपका भाई हूँ और रहूँगा भी हमेशा लेकिन ये किसी को भी पता नहीं चलेगा, मै आपसे बहुत प्यार करता हूँ, मै आपके साथ सेक्स करना चाहता हूँ, उसकी मजबूत बाहों ने मुझे भी पिघला दिया।

मुझे भी वो जकड़न अच्छा लगने लगा फिर मै बड़े ही शांत स्वर में तिरधनु से कहा, तिरधनु पता है ये बात किसी को पता चल गया तो क्या हाल होगा।
तिरधनु ने कहा माँ कसम दीदी मै कभी भी किसी को नहीं बताऊंगा, मैने कहा ठीक है, पर बस एक बार ही दूंगी, पहले प्रोमिस करो, तिरधनु ने प्रोमिस किया की एक ही बार वो मुझे चोदेगा।

मैने उसके तरफ घूम गयी, वो अब चूचियों को छोड़ कर मेरे बड़े बड़े चुतड़ को दोनों हाथ से दबा के अपने लण्ड के पास मेरे चुत से सटा लिया और धक्का मारने लगा, मैने उसके होठ को
अपने होठ से चूमना शुरू कर दी।आंधी तेज चल रही थी ठंड के मौसम में लण्ड का एहसास ,,आअह्ह्ह्ह्ह, मेरा शरीर गरम हो चुका था, मै तिरधनु का लण्ड मेरे भोसड़े में लेने के लिए काफी व्याकुल थी।
मै चुदना चाह रही थी, तभी तिरधनु ने मेरे ऊपर के गीले कपडो को उतार दिया, ओर मेरे बड़े बड़े चूचे उसके सामने जैसे ही आजाद हुए वो बच्चो की तरह पिने लगा।

मैने पूछा तिरधनु क्या मिल रहा है इसमें, इसमें से तो कुछ भी नहीं निकलेगा, तिरधनु ने कहा दीदी जब लड़की की चूची को पियों को अमृत दूध से नहीं बूर से निकलने लगती है देखो हाथ लगा के अपनी चुत पे अमृत निकल रहा होगा।

मैने अपने सलवार का नाड़ा ढीला किया और चुत पे हाथ लगा के देखा तो चुत गरम हो चुकी थी और लस लसीला पदार्थ निकल रहा था, मैने कहा हाँ तिरधनु सही कर रहे हो चुत से तो अमृत निकल रहा है पर तुम ऊपर क्या कर रहे हो पीना है तो अमृत पियो।

वो चूची को छोड़कर निचे बैठ गया और मैने दोनों पैर फैला दिए बीच में आके मेरी चुत को चाटने लगा, मै बैचेन होने लगी, मै उसके बाल को पकड़ के उसका मुँह भोसड़े में सटाये जा रही थी, मैने कहा बस तिरधनु अब चोद दो मुझे।

पूरी कर लो अपनी हसरत, मै तुम्हारी हूँ आज रात के लिए, जो मर्ज़ी कर लो मेरे साथ मै तुम्हारी हूँ, डिअर, आई लव यू माय ब्रदर, उसने मुझे गोद में उठा लिया।

और पलंग पे लिटा दिया, मेरे भोसड़े में खुजली हो रही थी, लग रहा था, जल्दी से लोड़ा, भोसड़े में ले लू, तभी तिरधनु मेरे पैर के पास बैठ गया मेरे दोनों पैर को फैला दिया और अपना लौड़ा, भोसड़े के ऊपर से गांड के छेद तक रगड़ा।

ऐसा उसने चार पांच बार किया मै तो उसकी लण्ड की रगड़न से काफी परेशान हो रही थी, मुझे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था और अज्जु मजा लेने में लगा हूँआ था। अचानक उसने पूरा का पूरा लण्ड मेरी चुत में उतार दिया।आआआआआःह्ह्ह्ह्ह्ह्हह्ह्ह।

बाहर निकाल इसको भोसडी के तेरी माँ को चोदु मादरचोद आआआअह्हह्हह्ह….मै दर्द से कराह रही थी, उसका लण्ड मेरी चुत में सेट हो चुका था, मेरी आँख में आंसू आ गए थे क्यों
की ये मेरी पहली चुदाई थी।

उसने लण्ड को धीरे धीरे निकाला और फिर से एक झटका दिया, मै तो पहले समझ रही थी उसका लण्ड पूरा चला गया पर मै गलत थी उसका लण्ड आधा ही अंदर गया था, अब दो इंच और गया तीसरे झटके में पूरा लण्ड मेरी चुत से होते हूँए पेट तक जा रहा था।

दर्द का एहसास हो रहा था पर ये एहसास अच्छा था, फिर वो मुझे जोर जोर से चोदने लगा, मैने भी गांड उठा उठा के चुदवा रही थी, कमरे में सिर्फ ऊऊऊऊआआःह्ह्ह्ह्ह्ह्..ठोक भेनचोद अपनी बहन को ले रंडी आज तेरी चुत का भोसड़ा बनाके छोडूंगा.. तेज कर बहन के लोडे, जैसी आवाजे आ रही थी।

और कुछ अंतिम झटके मेरी चमचम चुत में उसका पानी निकलने के साथ लगे। फिर कई तरह से मुझे पूरी रात उछाल उछाल कर चोदा। मैने पूछा तुम्हें इतने सारे पोज कैसे आते हैं, तो वो बोला हमलोग एडल्ट मूवी देखते है इसलिए मुझे पता है चुदाई का पोजीशन क्या होना चाहिए।

रात भर चोदने के बाद मेरा भोसड़ा सूज गया था दर्द के मारे चला नहीं जा रहा था सुबह के करीब चार बजे तिरधनु वापस अपने बंगले में सोने चला गया और मै भी सो गयी, उस रात का
चुदाई का एहसास गजब का था।

इस साल मेरी शादी होने वाली है। देखते है उतना मज़ा मिलता है की नहीं जितना अज्जु ने दिया था, वो अपनी प्रोमिस को नहीं निभा पाया।
और उसने मुझे कई बार चोदा जब भी उसका मन किया, मुझे भी लग रहा था ये गलत प्रोमिस मैने करवाया था उसके साथ क्यों की मुझे भी अपने भाई से चुदना अच्छा लगता था।

आपको मेरी ये कहानी कैसी लगी जरूर बताये, आपका एक मेल हमारा दिल खुश कर देता है.

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