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भाई ने चूत चोदवाने का तरीका बताया

Hindi sex story, antarvasna

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हेल्लो दोस्तों , मेरा नाम अंजलि है। मैं दिल्ली की रहने वाली हूं। मेरी उम्र 22 साल है मैं । अभी अभी जवान हुई हूँ। मेरी स्कूल में जवानी के चर्चे हैं। मैं देखने में बहुत हॉट बहुत ही सेक्सी जोशीली माल लगती हूं। मेरे को देख कर अच्छे-अच्छे लड़कों का लण्ड खड़ा हो जाता है। मैं देखने में बहुत सीधी सादी हूं। लेकिन मेरी चुत की प्यास कभी मिटती ही नहीं। जब से मेरे को चुदने की लत लगी तब से मेरे को हर रोज लण्ड खाने का मन करता है। चुदाई की ये लत मेरे बड़े भैया ने लगाईं थी। मेरे भाई का नाम आदर्श है यह बात 2 साल पहले की है। जब मैंअपने घर पर भैया पापा और मम्मी के साथ रहती थी। उस समय मेरी उम्र 19साल और मेरे बड़े भाई की उम्र 25 साल थी। मेरे भैया बहुत स्मार्ट और हैंडसम लगते थे। उनपर बहुत सारी लड़कियां फ़िदा थी। मेरे मोहल्ले की भी सारी लड़कियां मेरे भाई के ऊपर फिदा थी।मेरे से हमेशा मेरे भाई को पटाने की बातें किया करती थी। मैं भी अपने भाई से कुछ कम थोड़ी ना थी। मेरे 34 28 32 के फिगर पर मेरे मोहल्ले के सारे लड़के अपनी जान छिड़कते 
थे। जब भी मैं मोहल्ले से गुजरती सारे लड़के मुझे प्रपोज करने के लिए लाइन लगाये रहते थे। मेरे मम्मे बहुत बड़े-बड़े थे। मैं रात भर उन्हें दबा दबा कर खूब मजा लेती थी। मैं आज भी अपने भाई के साथ बिस्तर पर लेटती थी। हम दोनों रात भर काफी मजे करते थे। तकिये से खेल-खेल कर हम दोनों एक दूसरे को खूब आनंद लेते थे। कभी कभी तो मेरे भैया का लण्ड खड़ा हो जाता था। मेरे को छूने का मौका कभी कभी मिल जाता था। तो मैं देख लेती थी कि भैया का लण्ड खड़ा हो गया है। उस समय मेरे को यह नहीं पता था कि यह चीज लण्ड होती है। मेरे को तो सिर्फ यही पता था कि यह कोई सामान है जो लड़कों में पाई जाती है। एक बार भैया के साथ मैं बिस्तरपर खेल रही थी। अचानक भैया और हम दोनों नीचे गिर गए। मैं नीचे थी और भैया मेरे ऊपर थे। उनका लण्ड ठीक मेरी चुत के ऊपर चुभ रहा था।मै: भाई आपका कोई चीज मेरे उस जगह पर चुभ रही हैभैया: कहाँ चुभ रही हैमैं: जहां से मैं पेशाब करती हूं ठीक उसी के सामने पता नहीं कौन सी चीज चुभ रही है आपकीभैया: वह भी मेरी वह चीज है जिससे मैं पेशाब करता हूंमै: भैया मेरे को चीज दिखा दो जिससे तुम पेशाब करते होभैया का दिमाग खराब होने लगा उनका लण्ड खड़ा हो चुका था वह मेरे से कहने लगेभैया: अंजलि तेरे को मैं अपनी चीज दिखा रहा हूं लेकिन किसी को बताना मतमै: भैया मैं किसी को नहीं बताऊंगी प्लीज! आप जल्दी दिखाओ नाभैया: अंजलि तेरे को मैं अपनी पेशाब करने वाली चीज दिखाता हूं लेकिन तेरे को भी अपनी पेशाब करने वाली चीज दिखानी पड़ेगीमै: ठीक है बाबा मैं भी दिखा दूंगी लेकिन तुम तो पहले दिखाओइतना कहते भैया अपने पैजामे का नाड़ा खोलने लगे। उनके अंडरवियर का तंबू बना हुआ था। उनका लण्ड खंभे की तरह अंडरवियर में तना हुआ दिखाई दे रहा था। उस दिन उन्होंने सफेद रंग का पैजामा और सफेद रंग का ही अंडरवियर पहना हुआ था। देखने में तो उनका लण्ड बहुत ही मोटा लग रहा था। मैंने अपने हाथ से उनके अंडरवियर के ऊपर से लण्ड को स्पर्श किया।मेरे हाथ लगते ही उनका लण्ड ऊपर नीचे होने लगा। मेरे को छूने से डर लगने लगा। मैंने अपना हाथ झटके से हटाया।भैया: अंजलि तू डर क्यों रही है वो मेरा लण्ड है कोई बंदर नहीं जो काट लेगामै: भैया मेरे को छूने से डर लग रहा हैइतना कहते भैया ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने लण्ड पर रख दिया। धीरे-धीरे वह अपने लण्ड को मेरे हाथ से सहलाने लगे। उनका लण्ड और भी मोटा बड़ा होने लगा। वह और भी जल्दी ऊपर नीचे ऊपर नीचे होने लगा। मेरे को तो और जोर से डर लगने लगी। लेकिन बार-बार भैया ने मुझसे ऐसा करवा कर मेरा डर खत्म कर दिया। मैंने भैया का अंडरवियर नीचे कर दिया। फिर उसके अंदर का सामान देखकर मैं तो चौक ही गई। बाप रे! इतना बड़ा होता है पेशाब करने का सामान!मैं: भैया तुम्हारे पास पेशाब करने का सामान इतना बड़ा हैभैया: पगली से पेशाब करने के अलावा भी इससे काम किए जाते हैंमै: और कौन सा काम करते हो भैया इससे?? मेरे को तो बस इतना ही पता है कि इससे पेशाब किया जाता हैभैया मेरे से हर बात अब खुल के बताने लगें। मेरे को उन्होंने लण्ड औरचुत का संबंध बताया। वह मुझे बताये कि कैसे चुदाई की जाती है मेरे को सब कुछ समझ में आ गया था। मैंने भैया से करके दिखाने को कहा! भाई का का भी मूड बन गया था। वो गर्म हो चुके थे मेरी चुत देखने को तड़पने लगे।भैया: अंजलि तुम भी अपना वादा पूरा करो मुझे अपनी चुत दिखाओमैंने उस दिन सलवार और कुर्ता पहना हुआ था। पीले रंग का मेरा सूट देखकर वो और भी ज्यादा जोश में आ रहे थे। मैं ज्यादा गोरी तो नहीं थी लेकिन मेरा फिगर बहुत लाजवाब था। मेरे बदन पर मेरा कुर्ता कसा हुआ था। मेरी टाइट ब्रा कुर्ते के ऊपर उभरी हुई दिख रही थी। भैया कालण्ड ऊपर-नीचे हो रहा था। मैंने अपनी सलवार का नाड़ा खोला। नाडे को खोलते ही भैया ने सलवार नीचे सरका दी। मैं पैंटी में हो गई। मेरा लॉन्ग कुर्ता पैंटी सहित मेरी चुत को ढके हुआ था। भैया ने मेरा कुर्ता भी निकाल दिया। मैं अब भैया के सामने पैंटी और ब्रा मे खड़ी थी। भैया ने जल्दी से जा जाकर दरवाजा बंद कर दिया। भैया ने नीचे बैठकर मेरी पैंटी को निकाल दिया। मेरी चुत पर काफी बाल थे। जो कि बहुत बड़े हो चुके थे। भैया ने अपनी दाढ़ी काटने वाली मशीन से मेरी चुत के सारे बालों को हटा दिया। मेरी चिकनी चुत साफ साफ दिखाई देने लगी मेरे को यह भी नहीं पता था। मेरी चुत इतनी अच्छी है इतनी रसीली होगी। मै बहोत खुश हो गयी।आज मेरे को भैया के द्वारा अपनी चुत कि इस रूप का दर्शन करने को मिला। भैया मेरी रसीली चुत को देखते ही कुत्ते की तरह उस पर झपट पड़े। वह रसमलाई की तरह मेरी चुत को चाटने लगे। मेरे को बड़ा अजीब लग रहा था। पहली बार किसी ने मेरी चुत पर अपना मुंह रखा था। मेरी समझ में नहीं आ रहा था भैया इतने गंदे स्थान को चाट क्यों रहे हैं! कुछ ही पल में मेरे मुंह से अजीब अजीब तरह की आवाज निकलने लगी। मैं “……अई…अई….अई……अ ई….इसस्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की सिस्कारियां भरने लगी। भैया तो मेरी चुत को चाटे ही जा रहे थे। वो मेरी चुत के दाने को काट काट कर खींच रहे थे। धीरे-धीरे मेरे को भी अपनी चुत चटवाने में मजा आने लगा। हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम मैं अपनी गांड उठाकर भैया को चुत चटवा रही थी। कुछ देर भैया ने मेरी चुत चाट कर धीरे-धीरे किस करते हुए ऊपर की तरफ बढ़ने लगे। वह मेरी नाभि पर अपना मुंह रखकर नाभि को चाटने लगे। मैं भी गर्म होने लगी। उन्होंने मेरी चुत के शोले को भड़का दिया था। मेरी चुत में खुजली होने लगी उन्होंने मेरी ब्रा निकाल दी। मेरे दोनों संगमरमर जैसे चमकीले दूधों पर अपना हाथ रख कर दबाने लगे। मेरी सिसकारियों बढ़ने लगी मैं और जोर जोर से“..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअ अ….आ हा …हा हा हा” कीसिसकारी भरने लगी। वह अचानक से मेरे निप्पलों पर अपना मुंह रखकर बच्चों की तरह मेरे दूध को पीने लगे। भैया दांत गड़ा गड़ा कर मेरे दूध को पी रहे थे। मैं बिना कुछ समझी ही पता नहीं क्या क्या बोल रही थी। भैया और जोर जोर से मेरे चुच्चो को चूसो! काट डालो! आज मेरी बूब्स को और जोर से चूसो! और जोर से चूसो! भाई ने मेरी चुचियों को कुछ देर तक चूसा। उसके बाद वह मेरे गले पर किस करते हुए होठों को किस करने लगे। मैं बहुत ही गर्म हो चुकी थी।मै: भैया जो भी करना है जल्दी करो! मेरे को चुदने की उत्तेजना हो रहीहैभैया: चल बहना! तुझे आज में चुदाई करना सिखाता हूं। तू भी अपने भाई को याद रखेगीभैया मेरे होठों को और जोर-जोर से काट काट कर चूसने लगे। भैया ने मेरे को नीचे बिठा दिया। उनका लण्ड मेरे मुंह पर लग रहा था। भैया मेरे को अपना लण्ड चूसने को कहने लगे। मैं भी बहोत ज्यादा उत्तेजित थी। मैंने भैया का लण्ड अपने मुंह में भर लिया जोर-जोर से मैं उनका लण्ड चूसने के लगी। भैया मेरे मुंह में अपना लण्ड आगे पीछे करने लगे। उनका लण्ड मेरे गले तक जा रहा था। मेरी सांसे अटकने लगी मैंने भैया का लण्ड अपने मुंह से छुड़ाया। भैया ने मेरे को बिस्तर पर लिटा दिया मेरी दोनों टांगो को फैला कर मेरी चुत पर वह अपना लण्ड रगड़ने लगे। मेरी चुत कोयले की तरह गर्म होकर लाल लाल हो गई।वह मेरी चुत पर कुछ देर तक लण्ड को घुमा कर मजा लिए। उसके बाद उन्होंने मेरी चुत के छेद पर अपना लण्ड टिका दिया। चुत के छेद को निशाना बनाकर उन्होंने अपना लण्ड मेरी चुत में पेल दिया। जोर के धक्के से उनका लण्ड मेरी चुत में घुसा। उनके लण्ड का टोपा मेरी चुत में फंस गया उन्होंने धक्के पर धक्का मारकर अपना पूरा लण्ड मेरी चुत में घुसा दिया जोर जोर से चिल्लाने लगी। मेरी मुह से“……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ..ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” की चीखें निकलने लगी। मेरी आवाज सुनकर मम्मीदौड़ती हुई आई।मम्मी: क्या हुआ अंजलि बेटा!मै: कुछ नहीं मम्मा काकरोच आ गया थामम्मा वहां से चली गई। भैया अपना लण्ड मेरी चुत में धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगे। कुछ देर तक उन्होंने ऐसे ही चुदाई की। उसके बाद उन्होंने मेरा मुंह दबाया और जोर-जोर से अपना लण्ड मेरी चुत के अंदर बाहर करने लगे। मेरी मुह से अब कोई आवाज ही नहीं निकल पा रही थी। मैं अंदर ही अंदर सिसक रही थी। लगभग 25 बार चुत में झटके लगाने के बाद उन्होंने मेरा मुंह छोड़ दिया। अब मैं धीरे धीरे “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो…. की सिस्कारियां भर रही थी। भैया अपनी कमर उठा उठा कर मेरी चुदाई कर रहेथे। मैं भी अपनी गांड उठाकर चुदवा रही थी। भैया मेरे को बहुत अच्छी तरीके से चोद रहे थे मेरे को चुदाई करने में बड़ा मजा आ रहा था।भैया मेरी जवानी का रस ले रहे थे। वह मेरे दूध को मसल मसल कर चोदने लगे। उसने मेरी पोजीशन को बदला। वह बिस्तर पर लेट गए। मेरे को वह लोहे के रॉड जैसे टाइट लण्ड पर चुत रखकर बैठने को कहने लगे। मैं उनके लण्ड से अपनी चुत को सटा कर उस पर बैठ गई। उनका पूरा लण्ड मेरी चुत में घुस गया। मैं धीरे-धीरे ऊपर नीचे होकर चुदने लगी। भैया भी अपनी कमर उठा उठा कर मेरे को चोदने लगे। उनका पूरा लण्ड मेरी चुत में घुस घुस कर अंदर बाहर होने लगा। हमदोनों को ही स्पीड धीरे धीरे बढ़ने लगी भैया मेरी गांड पर हाथ से मार मार कर मेरे को और जोर-जोर से चुदने को कहने लगे। मैं “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ—ऊँ…ऊँ….” की आवाज के साथ जल्दी जल्दी ऊपर नीचे हो रही थी।लगभग 15 मिनट बाद मेरी चुत पानी जैसा कुछ निकलने लगा। भैया का पूरालण्ड भीग गया। फिर भी वह मेरी चुदाई करते रहे। उसी के कुछ देर बाद मेरे को अपनी चुत में कुछ गरमा गरम गिरता हुआ महसूस हुआ। शायद भैया भी मेरी चुत में झड़ चुके थे। भैया भी ढीले पड़ गए। उन्होंने चुदाई बंद कर दी। अपना लण्ड निकाल कर बिस्तर पर बेहाल होकर लेट गए। मैं भी उनके बगल हर दिन की तरह साथ में लेट गई। भैया ने मेरे को चोद कर बहोतही मजा दिया। उस रात भैया ने मेरी कई बार चुदाई की। रात में भैया का मौसम बनते ही कभी मेरी गांड में तो कभी चुत में अपना लण्ड घुसा घुसा कर खूब चुदाई की। मेरे को भी चुदने की लत लग गई। उसके कुछ दिन बाद भैया तैयारी करने पर चले गए। अब मुझे चोदने के लिए दूसरे मर्दों का सहारा लेना पड़ता है।

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