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मै अपनी प्यारी चुत चटवाने का भरपूर आनन्द ले रही थी

मै अपनी प्यारी चुत चटवाने का भरपूर आनन्द ले रही थी

दोस्तो, मेरा नाम आरुषि है।
आज मै आपको अपने पापा के शराब पीने के बुरी आदत और उससे होने वाली अपने परिवार की बर्बादी की कहानी सुनाना चाहती हूँ।

हमारे परिवार में मै, मेरे पापा संतोष और मेरी मम्मी सुनीता हैं, हम रोहतक, हरियाणा में रहते हैं, पापा का प्रॉपर्टी डीलिंग का बिज़नस है।काम अच्छा चल रहा था तो सब ठीक था, पापा के बहुत से दोस्त थे जिनके साथ पापा अक्सर खाते पीते थे।पर 2013 के बाद पापा का बिजनेस डूबना शुरू हो गया।तब मै दसवीं क्लास में पढ़ती थी।पापा ने बहुत कोशिश की पर उनका बिजनेस ठीक से नहीं चला।
जिस वजह से पापा बहुत परेशान रहने लगे, और परेशानी में और शराब पीने लगे।

2013 और 2015 में तो पापा ने बहुत से लोगो से पैसा उधर लेकर या कर्ज़ लेकर काम शुरू करने की बहुत कोशिश की पर कोई फायदा नहीं हुआ।

इस कारण पापा के बहुत से दोस्त भी उनका साथ छोड़ गए, रिश्तेदारों ने भी मुँह मोड़ लिया।
मगर पापा ने शराब की लत नहीं छोड़ी।

एक दिन पापा के दो दोस्त शर्माजी और गुप्ताजी शाम को हमारे घर आए, वो अपने साथ शराब की दो बोतलें और खाने का सामान ले कर आए थे।

जब उन्होने पापा के साथ पीनी शुरू कर दी तो मम्मी ने मुझे दूसरे कमरे में भेज दिया।

दोनों कमरों के बीच में एक जाली का दरवाजा था जिसे मैने अंदर से लॉक कर लिया पर मुझे बाहर सब दिख रहा था।

पापा उनके साथ दारू पी रहे थे और मम्मी उनके लिए खाने का सामान बना बना के दे रही थी।

जब दारू का सुरूर चढ़ने लगा तो उन दोनों हरामियों की निगाह मेरी मम्मी पर ही टिकी हुई थी।
वो दोनों आती-जाती मेरी मम्मी के बदन को अपनी निगाहों से टटोल रहे थे।

पापा तो पी पी के टल्ली हुये पड़े थे, उनको तो कोई होश ही नहीं था।

तब शर्माजी ने मम्मी को अपने पास बुलाया और झूठ मूठ की हमदर्दी दिखाने लगे।

बातों बातों में शर्मजी ने मम्मी के कंधे पे हाथ रखा जिसका मम्मी ने कोई विरोध नहीं किया, तो उन्होने धीरे धीरे अपने हाथ से मम्मी की पीठ सहलानी शुरू की।

मै यह देख कर हैरान थी कि मम्मी उसकी इस हरकत का विरोध क्यों नहीं कर रही!

और देखते देखते शर्माजी ने मम्मी को अपनी आगोश में ले लिया और मम्मी ने भी उनके कंधे पे अपना सर टिका दिया।

तभी गुप्ताजी उठे और मम्मी के दूसरी तरफ आ कर बैठ गए।

और उन्होंने बैठते ही मम्मी के ब्लाउज़ में हाथ डाल दिया।

बस फिर तो दोनों मम्मी के ऊपर टूट पड़े।

एक मिनट में ही उन दोनों ने मम्मी की साड़ी, ब्लाउज़, ब्रा और पेटीकोट उतार फेंका।

मम्मी को नंगी करने के बाद उन दोनों ने भी अपने कपड़े उतारे और मम्मी से चिपक गए, कोई उसके बूब्स चूस रहा था, कोई उसकी चुत में उंगली कर रहा था।

बेड की एक तरफ पापा दारू पी कर बेहोश लेटे पड़े थे और दूसरी तरफ मम्मी को वो दो वहशी चिपटे हुए थे।

दोनों ने जम कर मम्मी से सेक्स किया, मै सारा कुछ अपने कमरे में लेटी देख रही थी।
बेशक मुझे यह अच्छा नहीं लग रहा था, पर हूँ तो मै भी इंसान, थोड़ी देर बाद मेरा भी मन करने लगा, मैने अपनी स्कर्ट ऊपर उठाई, पेंटी उतरी और अपनी उंगली से अपनी चुत को मसलने लगी, मै भी चाहती थी को दोनों में से कोई मेरे पास भी आए और मुझे भी चोदे।

पर उन दोनों ने सिर्फ मम्मी से किया।

थोड़ी देर बाद मेरा तो पानी छुट गया और मै करवट बदल कर सो गई, वो कब गए, मुझे नहीं पता।

अब तो यह रोज़ का ही काम हो गया था।

पापा का कोई दोस्त आता, पापा को खूब शराब पिलाता और उसके बाद मम्मी से सारा खिलाया पिलाया वसूल करता।

हर दूसरे या तीसरे दिन शर्माजी या गुप्ता जी में से कोई न कोई मम्मी को को पकड़ लेता।

अब तो मम्मी भी पूरी खुलने लगी, वो भी पापा और उनके दोस्तो के साथ एक आध पेग मार लेती।

उसके बाद सेक्स का नंगा नाच होता, उधर मम्मी लण्ड लेती और इधर अपने कमरे में मै अपनी उंगली लेती।

मम्मी मुझे बड़ी एहतियात से उस सब से छुपा कर रख रही थी, मुझे कभी भी उनके सामने नहीं आने देती।

मगर बकरे के मम्मी कब तक खैर मनाती।

एक दिन दोपहर को मै स्कूल से आकार खाना खाकर बेड पे लेट गई, टीवी देखते देखते मुझे नींद आ गई।

थोड़ी देर बाद मुझे लगा जैसा कोई मेरे बदन को सहला रहा है।
मेरी नींद खुल गई।

मैने देखा कि शर्मा अंकल ने मेरी स्कर्ट सारी ऊपर उठा रखी थी और वो पेंटी के ऊपर से मेरी चुत सहला रहे थे।

पहले तो मै एकदम से घबरा गई, पर वो बोले- अरे गुड़िया बेटी उठ गई, डोंट वरी, मै हूँ, आराम से लेटी रहो, तुम बहुत एंजॉय करोगी।

मैने पूछा- मम्मी?

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वो बोले- वो गुप्ता जी के साथ दूसरे कमरे में है, और मज़े कर रही है, तुम भी मज़ा लेना चाहोगी?

मै तो खुद मरी जा रही थी यो मैने हाँ में सर हिलाया।

बस फिर तो शर्माजी ने झट से मेरी पेंटी उतार दी।

तब मेरी चुत पे हल्के हल्के बाल आ गए थे।

‘ओह माइ गॉड, क्या कमसिन और प्यारी चुत है तुम्हारी!’

यह कह कर उन्होंने अपना पूर मुँह खोला और मेरी छोटी सी प्यारी चुत को पूरा अपने मुँह में ले लिया जैसे खा ही जाएँगे।

उसके बाद उन्होने अपनी पूरी जीभ मेरी चुत की लकीर पर फेरी और अपनी जीभ मेरी चुत के अंदर तक डाल कर चाटने लगे।

मै तो जैसे तड़प उठी, मैने साइड पे देखा, पापा दारू पी के धुत्त हुये पड़े थे, उन्हें कोई होश नहीं था कि साथ वाले कमरे में उनकी बीवी चुद रही है और उनके बिल्कुल साथ उनकी बेटी भी अपना कौमार्य लुटवाने वाली है।

मेरी छोटी प्यारी चुत चाटते चाटते शर्माजी ने मेरे शर्ट के बटन खोले और एक एक करके मेरे सारे कपड़े उतार दिये।

मैने अपनी टाँगों को उनके सर के अगल बगल लपेटा हुआ था, मेरी आँखें बंद थी और मै अपनी प्यारी चुत चटवाने का भरपूर आनन्द ले रही थी।

तभी शर्माजी उठे और उन्होने अपने भी सारी कपड़े उतार दिये और लण्ड मेरी तरफ करके बोले- चूसेगी इसे?

मैने ना में सर हिलाया।

तो उन्होने कहा- कोई बात नहीं, ऊपर वाले होंठों से नहीं तो नीचे वाले होंठो में ले ले!

यह कह कर उन्होंने मुझे सीधा किया और अपना लण्ड मेरी प्यारी चुत पे सेट किया।

मै आने वाले खतरे से बेखबर अपनी टाँगें उठा कर उनके नीचे लेटी थी।

शर्माजी ने अपने लण्ड पे ढेर सारा थूक लगाया, और मेरी चुत पर दोबारा सेट करके मुझे बड़ी अच्छी तरह से अपनी आगोश में जकड़ लिया।

मेरे होंठों को अपने होंठों में ले लिया और फिर अपना लण्ड मेरी प्यारी चुत में घुसेड़ने लगे।

जिस काम को मै मज़े का समझ रही थी वो तो बहुत दर्दनाक निकला, मुझे लगा जैसे कोई मेरे जिस्म को बीच में से चीर रहा हो, या एक गरम लोहे के सलाख मेरे जिस्म से आर पार निकल रही हो।

मै तो दर्द से तड़प उठी, मै छटपटाना चाहती थी पर शर्मा अंकल ने मुझे बड़ी मजबूती से जकड़ रखा था।

मेरे तड़पने पर उन्होने और ज़ोर लगाना शुरू कर दिया और मेरी कुँवारी प्यारी चुत को बीच में से चीरते हुये उन्होने अपना आधे से ज़्यादा लण्ड मेरे बदन में घुसेड़ दिया।

अब दर्द मेरी बर्दाश्त से बाहर था और मै चीख पड़ी।

मेरी चीख सुनते ही मम्मी दूसरे कमरे से भागी भागी आई, मम्मी जल्दबाज़ी में वो जैसे थी वैसे ही आ गई, यानि कि बिल्कुल नंगी अवस्था में !
पीछे पीछे गुप्ता अंकल भी आ गए वो भी बिल्कुल नंगे।

मगर जब तक मम्मी आती और सब समझती, शर्मा अंकल ने अपना पूरा लण्ड मेरे अंदर प्रविष्ट करवा दिया था।

मम्मी ने एकदम से शर्मा अंकल को खींच के पीछे फेंका, मगर तब तक तो चुत के उदघाटण की सारी कार्यवाही हो चुकी थी, मेरी चुत खून से लथपथ थी, शर्मा अंकल के लौड़े पर भी खून लगा था।

मम्मी ने शर्मा अंकल को बहुत भला बुरा कहा, मगर अब क्या हो सकता था।

शर्मा अंकल और गुप्ता अंकल दोनों ने अपने कपड़े पहने और चले गए।

मै और मम्मी दोनों नंगी हालत में ही एक दूसरे से लिपट के कितनी देर रोती रहीं।

मै दर्द की वजह से और मम्मी पता नहीं क्यों।

दो तीन दिन कोई हमारे घर नहीं आया, उसके बाद एक दिन गुप्ता अंकल आए और हम सब के लिए खूब तोहफे और ना जाने क्या क्या लाये।

उसके बाद फिर वही दारू का दौर शुरू हो गया।

जब पापा फिर पी कर लुढ़क गए तो गुप्ता अंकल ने मम्मी के सामने खुल्लम खुल्ला कहा- देख सुनीता, तू तो चल है ही हमारी, पर जो शर्मा ने कर दिया, उसको तो ठीक किया नहीं जा सकता, पर अगर तू चाहे तो हम तेरा घर मोतियों से भर देंगे, मगर एक शर्त है।

चाहे मम्मी उनकी बात का मतलब समझ गई थी, पर ‘क्या शर्त है?’ मम्मी ने पूछा।

‘अब तेरे साथ साथ आरुषि को भी अपने ग्रुप में शामिल कर लेते हैं, वो भी अब जवान हो चुकी है, उसको भी ज़िंदगी जीने का हक़ है।’

उस दिन पहली बार मम्मी ने मुझे अपने कमरे में बुलाया और तब गुप्ता अंकल में मुझे अपनी गोद में बिठाया और बहुत प्यार किया।

मगर अब मै भी समझती थी के इस प्यार का मतलब क्या है।

आधे घंटे बाद मै, मम्मी और गुप्ता जी तीनों बिल्कुल नंगे एक दूसरे को चूम चाट रहे थे।

थोड़ी देर बाद गुप्ताजी ने फोन करके शर्माजी को भी बुला लिया ताकि जो काम उस दिन अधूरा रह गया था वो पूरा हो सके।

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